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वह मृग कस्तूरी मैं उसकी क्या कहूँ व्यथा अब विरह की

वह मृग
कस्तूरी मैं उसकी
क्या कहूँ व्यथा अब विरह की

बादल बरसे
उष्णता हरते नहीं
प्रेम बोल भी अब
कर्ण तृप्त करते नहीं

विचलित अलसायी 
जीवन दोपहरी
उषा संध्या मन हरते नहीं
गहन रात्रि भयभीत करती
नेत्र निद्रा बिन अब
काजल प्रेम करते नहीं

श्वास उच्छवास् 
आह बन अब
प्रिय नाम जप थकते नहीं

कैसे कहूँ व्यथा विरह की
पलछिन बाट जोहते 
आँख मूँद तनिक रहते नहीं!
🌹
 #mनिर्झरा 
©️®️
#वियोग 
#वियोग_शृंगार_रस 
#hindipoetry 
#yqlove 
#yqdidi 
#bestyqhindiquotes
वह मृग
कस्तूरी मैं उसकी
क्या कहूँ व्यथा अब विरह की

बादल बरसे
उष्णता हरते नहीं
प्रेम बोल भी अब
कर्ण तृप्त करते नहीं

विचलित अलसायी 
जीवन दोपहरी
उषा संध्या मन हरते नहीं
गहन रात्रि भयभीत करती
नेत्र निद्रा बिन अब
काजल प्रेम करते नहीं

श्वास उच्छवास् 
आह बन अब
प्रिय नाम जप थकते नहीं

कैसे कहूँ व्यथा विरह की
पलछिन बाट जोहते 
आँख मूँद तनिक रहते नहीं!
🌹
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