गुरु🙏 मार्गदर्शन या पथनिर्माण हर राह पर सहयोग हैं | हिंदी कविता

"गुरु🙏 मार्गदर्शन या पथनिर्माण हर राह पर सहयोग हैं करते, जन्मदाता से प्राप्त जीवन में ज्ञान प्रकाश गुरु हैं भरते। ईश्वर तक पहुँचने का मार्गदर्शन गुरु ने है किया, महाकवि कबीर ने भी उनको प्रभु से उच्च स्थान दिया। अज्ञान भरे इस जीवन में दान ज्ञान का दिया, जाने कितने अज्ञानियों को तुमने विद्वान किया। सब कला और विद्या में तुम करते निपुण हमें, अधूरे हैं ज्ञान बिना तुम करते हो पूर्ण हमें। निराश अज्ञानी जग में ज्ञान की तुम एक आशा हो, इस मौन निःशब्द दुनिया में तुम पवित्र एक भाषा हो। अस्थायी इस सृष्टि में केवल गुरु एक शाश्वत हैं, तुम्हारे संरक्षण में दुनिया इसलिए प्रभु भी आश्वस्त हैं। विद्या अगर गुरु वशिष्ठ और विश्वामित्र से ना पाते, तो शायद श्री राम भी ना पुरुषोत्तम कहलाते। सदसनिध्य गुरु का उस ईश्वर का वरदान है, जीवन का तो अर्थ ही गुरु से प्राप्त ज्ञान है। सीखाया हमको जीवन के संघर्षों से लड़ना, और बिना रुके लक्ष्य के अग्निपथ पर चलना। तुम ही हो जो इस सृष्टि का इतिहास निर्मित करते हो, और भविष्य में भी सबके तुम ही उज्ज्वलता भरते हो। ऋण रहेगा सदैव हम पर, देते हैं सम्मान तुम्हें, ईश्वर से भी पहले गुरु करते हैं प्रणाम तुम्हें।"

गुरु🙏
मार्गदर्शन या पथनिर्माण हर राह पर सहयोग हैं करते,
जन्मदाता से प्राप्त जीवन में ज्ञान प्रकाश गुरु हैं भरते।
ईश्वर तक पहुँचने का मार्गदर्शन गुरु ने है किया,
महाकवि कबीर ने भी उनको प्रभु से उच्च स्थान दिया।
अज्ञान भरे इस जीवन में दान ज्ञान का दिया,
जाने कितने अज्ञानियों को तुमने विद्वान किया।
सब कला और विद्या में तुम करते निपुण हमें,
अधूरे हैं ज्ञान बिना तुम करते हो पूर्ण हमें।
निराश अज्ञानी जग में ज्ञान की तुम एक आशा हो,
इस मौन निःशब्द दुनिया में तुम पवित्र एक भाषा हो।
अस्थायी इस सृष्टि में केवल गुरु एक शाश्वत हैं,
तुम्हारे संरक्षण में दुनिया इसलिए प्रभु भी आश्वस्त हैं।
विद्या अगर गुरु वशिष्ठ और विश्वामित्र से ना पाते,
तो शायद श्री राम भी ना पुरुषोत्तम कहलाते।
सदसनिध्य गुरु का उस ईश्वर का वरदान है,
जीवन का तो अर्थ ही गुरु से प्राप्त ज्ञान है।
सीखाया हमको जीवन के संघर्षों से लड़ना,
और बिना रुके लक्ष्य के अग्निपथ पर चलना।
तुम ही हो जो इस सृष्टि का इतिहास निर्मित करते हो,
और भविष्य में भी सबके तुम ही उज्ज्वलता भरते हो।
ऋण रहेगा सदैव हम पर, देते हैं सम्मान तुम्हें,
ईश्वर से भी पहले गुरु करते हैं प्रणाम तुम्हें।

गुरु🙏 मार्गदर्शन या पथनिर्माण हर राह पर सहयोग हैं करते, जन्मदाता से प्राप्त जीवन में ज्ञान प्रकाश गुरु हैं भरते। ईश्वर तक पहुँचने का मार्गदर्शन गुरु ने है किया, महाकवि कबीर ने भी उनको प्रभु से उच्च स्थान दिया। अज्ञान भरे इस जीवन में दान ज्ञान का दिया, जाने कितने अज्ञानियों को तुमने विद्वान किया। सब कला और विद्या में तुम करते निपुण हमें, अधूरे हैं ज्ञान बिना तुम करते हो पूर्ण हमें। निराश अज्ञानी जग में ज्ञान की तुम एक आशा हो, इस मौन निःशब्द दुनिया में तुम पवित्र एक भाषा हो। अस्थायी इस सृष्टि में केवल गुरु एक शाश्वत हैं, तुम्हारे संरक्षण में दुनिया इसलिए प्रभु भी आश्वस्त हैं। विद्या अगर गुरु वशिष्ठ और विश्वामित्र से ना पाते, तो शायद श्री राम भी ना पुरुषोत्तम कहलाते। सदसनिध्य गुरु का उस ईश्वर का वरदान है, जीवन का तो अर्थ ही गुरु से प्राप्त ज्ञान है। सीखाया हमको जीवन के संघर्षों से लड़ना, और बिना रुके लक्ष्य के अग्निपथ पर चलना। तुम ही हो जो इस सृष्टि का इतिहास निर्मित करते हो, और भविष्य में भी सबके तुम ही उज्ज्वलता भरते हो। ऋण रहेगा सदैव हम पर, देते हैं सम्मान तुम्हें, ईश्वर से भी पहले गुरु करते हैं प्रणाम तुम्हें।

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