"आओ हम और तुम मोहब्बत कर लेते ह..." Poetry By Ahirnish Kumar | Nojoto

आओ हम और तुम मोहब्बत कर लेते है तुम कर लो निकाह क़बूल और हम मांग भर देते है क्या होगा इंतकाम सब को कह देते है मैं केशरिया बाना और तुम हरी पोशाक पहन लेते है आओ हम और तुम एक साथ, सफेद कफ़न में सो जाते है। अरे! मज़हब के रखवाले जाने क्या कहेगें तुम्हें फ़तवा और हमें भगवा देंगे आओ फिर भी हम और तुम मोहब्बत कर लेते है जाने हम और तुम किस-किस बात से डर लेते है। तमाम हदें आज पार कर लेते हैं खानदान भी सारा खिलाफ़ कर लेते है आओ बाप की पगड़ी आज उछाल देते है बन पियादे आज तिरछी चाल लेते है आओ हम और तुम मोहब्बत कर लेते है सारे क़ायनात में एक ही काला रंग कर देते है। मैं मंत्र और तुम आयतें याद कर लेना मैं तेहरवीं पर सब्जी-पूड़ी और तुम चालीसवें दिन खीर बना देना अरे! मुफ़्त की रेवड़ियों पर कहीं राजनेताओं का मेला ना लग जाये ऐसा करना कि तुम घर के बाहर 'नोटो' लिख देना क्या पता कोई फूल पकड़ा के हाथ मिला जाये बिन पूछें ही कोई अपनी मजार पर झाड़ू लगा आये। आओ फिर भी हम और तुम मोहब्बत कर लेते है। #nojoto #hindi #lovequote #poetry. Follow Ahirnish Kumar. Download Nojoto App to get real time updates about Ahirnish Kumar & be part of World's Largest Creative Community to share Writing, Poetry, Quotes, Art, Painting, Music, Singing, and Photography; A Creative expression platform. Poetry By Ahirnish Kumar | Nojoto Poetry on Poetry, Nojoto, Hindi, lovequote. Poetry Poetry, Nojoto Poetry, Hindi Poetry, lovequote Poetry

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3 months ago

#nojoto #hindi #lovequote #poetry

आओ हम और तुम मोहब्बत कर लेते है
तुम कर लो निकाह क़बूल और हम मांग भर देते है
क्या होगा इंतकाम सब को कह देते है
मैं केशरिया बाना और तुम हरी पोशाक पहन लेते है
आओ हम और तुम एक साथ,
सफेद कफ़न में सो जाते है।
       अरे! मज़हब के रखवाले जाने क्या कहेगें
       तुम्हें फ़तवा और हमें भगवा देंगे
       आओ फिर भी हम और तुम मोहब्बत कर लेते है
       जाने हम और तुम किस-किस बात से डर लेते है।
तमाम हदें आज पार कर लेते हैं
खानदान भी सारा खिलाफ़ कर लेते है
आओ बाप की पगड़ी आज उछाल देते है
बन पियादे आज तिरछी चाल लेते है
आओ हम और तुम मोहब्बत कर लेते है
सारे क़ायनात में एक ही काला रंग कर देते है।
मैं मंत्र और तुम आयतें याद कर लेना
मैं तेहरवीं पर सब्जी-पूड़ी 
और तुम चालीसवें दिन खीर बना देना
अरे! मुफ़्त की रेवड़ियों पर कहीं राजनेताओं का मेला ना लग जाये
ऐसा करना कि तुम घर के बाहर 'नोटो' लिख देना
क्या पता कोई फूल पकड़ा के हाथ मिला जाये
बिन पूछें ही कोई अपनी मजार पर झाड़ू लगा आये।
आओ फिर भी हम और तुम मोहब्बत कर लेते है।

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