White बेज़ारी लफ्ज़ों की धार से चीर रही थी वो मेरा सिना, रोक लो एक लम्हा खुद को मेरे लिए, मुझे नहीं एक साथ तेरी नाराज़गी का ये कड़वा घूँट पीना, डरता हूँ मेरी जुबां न कड़वी हो जाए तेरे लिए, एक दो लम्हा और सही, पर तेरे साथ ही है जीना, तेरे चेहरे की शिकस्त बता रही है तेरी नाराज़गी, पर आँखें न छुपा पाए तेरी सादगी, आँखों में अश्क लिए, पटक रही है हाथों को जोर जोर से मेरे सिने में। जानती है वो मैं नज़रअंदाज़ न कर पाऊँगा उसे। कर लूँ ऐसा तो क्या मज़ा है जीने में। मैंने भी मोहब्बत की महक ढूंढ ली तेरे हल्के कांपकपाते होंठों से एक प्यारी। जो इत्र की तरह फैल रही है धीरे-धीरे हवा में सारी की सारी, ©Ajay Singh Bisht #love_qoutes #दोस्त शायरी