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प्रेम की बस इतनी नाराजगी है कि जिससे प्रेम हो उ

प्रेम की बस इतनी 
 नाराजगी है कि जिससे प्रेम हो 
उससे दूर नहीं रहा जाता।
प्रेम में इतना समर्पण है कि 
न चाहते हुए भी 
त्यागना पड़ता है 
सबके हितार्थ, किन्तु 
एक तड़प, एक चाहत
और उम्मीद हमेशा 
बनी रहती है
पापा और बेटी के प्रेम को 
परिभाषित करना 
नामुमकिन है।

©Deepa Didi Prajapati 
  #Dear_Papa#Lovely_Daughter