*आवारा सपनें* आजकल जल्दी ही सो जाया करती हूँ! थक जाती हूँ तो रात को ही चैन पाती हूँ! कुछ ख्वाहिशों को पूरा करने रोज निकलती हूँ! आवारा सपनें है उन्हीं को सच करना चाहती हूँ! ख़ुद को पाती लोगों की भीड़ में, मैं भी उस भीड़ में खो जाती हूँ! मूँद कर पलकों को रात भर जागा करती हूँ! बाते करती अँधेरों से पर ख़ामोश रहती हूँ! इच्छाओं का अंत तो नहीं होता, मग़र शौक़ बहुत कम रखती हूँ! चाहिए मुझे बस इतना की गुजारा हो जाए, मैं अपना नहीं अपनों के लिए जीना चाहती हूँ! मुक्त रखूं अपनों को हर चिंता से, उनके लिए ही कमाना चाहती हूँ! ऐ ख़ुदा मेरी इतनी सी दुआ कुबूल कर दे। मेरे अपनों के दामन खुशियाँ भरपूर करदे। बना सहारा मुझे की मैं कुछ काम आ सकूँ, मेरी माँ मुस्काते रहे,पिता का सिर गर्व से उठे। #kkआवारासपने #कोराकाग़ज़ #जन्मदिनकोराकाग़ज़ #जन्मदिनमहाप्रतियोगिता #collabwithकोराकाग़ज़ #yqbaba #yqdidi #हवा