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White सुंदरकांड का महत्व जब आप नकारात्मक ऊर्जा औ

White सुंदरकांड का महत्व 

जब आप नकारात्मक ऊर्जा और आसुरी शक्तियों से प्रभावित होते है तब
अचानक से आपके आस पास के लोग, आपके घर परिवार के लोग आपसे बिना किसी ठोस कारण के बात करना बंद कर देते है। 
यदि बात करते भी है तो केवल बहस, झगड़ा, घृणा, नफरत या दोषारोपण करते है। 
या फिर झूठ बोलते है और धोखा देते है।
 अगर आप सच जानने की कोशिश करते है तो लोग आपसे दूर भागने लगते है। 
अचानक से आसपास के लोग आपको इग्नोर करना शुरू कर देते है। 
पूरा माहौल तनाव पूर्ण हो जाता है।
आप कितना भी अच्छा काम करे, कितनी भी मेहनत करे, आपको केवल घृणा, नफरत और कटु शब्द ही मिलते है।

ऐसी नकारात्मक ऊर्जा और आसुरी शक्तियों से छुटकारा पाने के लिए रोज सुंदरकांड, भगवद्गीता और हनुमान चालीसा का पाठ करे.।।

©Divyanjli Verma #Thinking सुंदरकांड का महत्व 

जब आप नकारात्मक ऊर्जा और आसुरी शक्तियों से प्रभावित होते है तब
अचानक से आपके आस पास के लोग, आपके घर परिवार के लोग आपसे बिना किसी ठोस कारण के बात करना बंद कर देते है। 
यदि बात करते भी है तो केवल बहस, झगड़ा, घृणा, नफरत या दोषारोपण करते है। 
या फिर झूठ बोलते है और धोखा देते है।
 अगर आप सच जानने की कोशिश करते है तो लोग आपसे दूर भागने लगते है। 
अचानक से आसपास के लोग आपको इग्नोर करना शुरू कर देते है।
White सुंदरकांड का महत्व 

जब आप नकारात्मक ऊर्जा और आसुरी शक्तियों से प्रभावित होते है तब
अचानक से आपके आस पास के लोग, आपके घर परिवार के लोग आपसे बिना किसी ठोस कारण के बात करना बंद कर देते है। 
यदि बात करते भी है तो केवल बहस, झगड़ा, घृणा, नफरत या दोषारोपण करते है। 
या फिर झूठ बोलते है और धोखा देते है।
 अगर आप सच जानने की कोशिश करते है तो लोग आपसे दूर भागने लगते है। 
अचानक से आसपास के लोग आपको इग्नोर करना शुरू कर देते है। 
पूरा माहौल तनाव पूर्ण हो जाता है।
आप कितना भी अच्छा काम करे, कितनी भी मेहनत करे, आपको केवल घृणा, नफरत और कटु शब्द ही मिलते है।

ऐसी नकारात्मक ऊर्जा और आसुरी शक्तियों से छुटकारा पाने के लिए रोज सुंदरकांड, भगवद्गीता और हनुमान चालीसा का पाठ करे.।।

©Divyanjli Verma #Thinking सुंदरकांड का महत्व 

जब आप नकारात्मक ऊर्जा और आसुरी शक्तियों से प्रभावित होते है तब
अचानक से आपके आस पास के लोग, आपके घर परिवार के लोग आपसे बिना किसी ठोस कारण के बात करना बंद कर देते है। 
यदि बात करते भी है तो केवल बहस, झगड़ा, घृणा, नफरत या दोषारोपण करते है। 
या फिर झूठ बोलते है और धोखा देते है।
 अगर आप सच जानने की कोशिश करते है तो लोग आपसे दूर भागने लगते है। 
अचानक से आसपास के लोग आपको इग्नोर करना शुरू कर देते है।
divyanjliverma6782

Divyanjli Verma

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