(एक श्याम प्रेमी का पत्र अपने श्याम जी के लिये) "इस पत्र में श्याम प्रेमी की भावनाएं है श्याम जी के लिए" सुनो, श्याम प्यारे..., मुझे नही पता कि मेरी इन आँखों को तलाश किसकी है? बस तुम्हें देखते है तो ये नजरें मेरी थम सी जाती है। सुनो कान्हा मेरी बात..., कौन सी बात? की प्राथना तो मेरी ये है आपसे की आप मुझे अपने ही रंग में रंग लो और भाव तो मेरे ये है कि, तुम्हारे रंग में रंग के हम सिर्फ तुम्हारे हो जाये। और सदा के लिए तुम्हारे पास ही रहे।लेकिन, मैं अपनी असमर्थता भी जानती हूँ और ये भी माना कि, मैं इस योग्य भी नही हूँ की, मैं आपकी कुछ कहलाऊँ। कोई पूजा-पाठ नही कोई विधि-विधान भी नही, जो धर भेंट मैं तुम्हें चढ़ाऊँ। मैं तो इस काबिल भी नही हूँ श्याम प्यारे की, मैं अपने ये भाव आपको समझाऊँ। मुझमे कोई मधुर-तान नही, कोई रूप-मान भी नही है फिर मैं कैसे तुमको रिझाऊं? फिर भी मेरे दिल की ख्वाहिश यही है श्याम प्यारे की, लोग कहे मैं आपकी दीवानी कहलाऊँ अब मेरी इस अर्जी को ठुकराओ ना ओ प्रियतम प्यारे..! और सुनो। श्याम प्यारे, एक शिकायत है मेरी तुमसे की, तुम क्यों नही आते हो मेरे इन नैनो में प्रेम की ज्योत जलाने? क्यों नही आते हो मेरे मन-मंदिर में अपनी बंसी की मधुर तान सुनाने ? क्यों नही आते हो तुम है श्याम मेरे ह्रदय में प्रेम रास रचाने? आखिर क्यों नही आते हो मेरी विरह व्यथा सुनने? प्यारे क्या मेरा ये जीवन यूँ ही बीतेगा? क्या मुझे तुम्हारा दर्शन कभी नही होगा? सुनो श्याम प्यारे मेरी एक बात की ना तरसाओ मुझे इतना ओ राधा के प्रियतमा की, अब मन है मेरा घबराएं। नही जानती ओ प्यारे की ना जाने कैसा रंग ये चढ़ा है मुझपर आपके प्रेम का की लाख कोशिशों पर भी ये छूटता ही नही है, ऐसा बंधन बांध लिया है मेरी रूह ने आपसे के मेरा ये दिल टूट जाये लेकिन, आपसे मेरी प्रीत का ये धागा टूटता नही है। ओ श्याम प्यारे गर मोहोब्बत होती मेरे दिल मे आपके लिए तो कब का मिटा देती लेकिन, मैंने तो दिल से इबादत की है आपकी इसलिए मेरा ये दिल आपसे रूठता नही है। प्यारे मेरी हर इक सांस में तुम हो, मेरी रगों में सिर्फ तुम समाते हो, मेरे ह्रदय में हर पल आपके होने का ऐसा भरम है जो कभी टूटता ही नही है। ©राधाकृष्णप्रिय Deepika🌠 (एक श्याम प्रेमी का पत्र अपने श्याम जी के लिये) "इस पत्र में श्याम प्रेमी की भावनाएं है श्याम जी के लिए" सुनो, श्याम प्यारे..., मुझे नही पता कि मेरी इन आँखों को तलाश किसकी है? बस तुम्हें देखते है तो ये नजरें मेरी थम सी जाती है। सुनो कान्हा मेरी बात..., कौन सी बात? की प्राथना तो मेरी ये है आपसे की आप मुझे अपने ही रंग में रंग लो और भाव तो मेरे ये है कि, तुम्हारे रंग में रंग के हम सिर्फ तुम्हारे हो जाये।