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jab ek ful ki पंखुड़ी बंद रेहती है। वो कली कहलाती

jab ek ful ki पंखुड़ी बंद रेहती है। वो कली कहलाती हैं।
jab wo hi ful ki पंखुड़ी खिल जाती हैं।
वो फूल कहलाती हैं।
और
jab wo hi ful ki wahi पंखुड़ी बिखर जाती है। 
wo apki ज़िन्दगी का सबक बन जाती हैं।

zindagI Kali jaise suru hoti hai aur पंखुड़ी ki tarah bikhar Kar khatam... #Zindagi  #Ki#Kahani
jab ek ful ki पंखुड़ी बंद रेहती है। वो कली कहलाती हैं।
jab wo hi ful ki पंखुड़ी खिल जाती हैं।
वो फूल कहलाती हैं।
और
jab wo hi ful ki wahi पंखुड़ी बिखर जाती है। 
wo apki ज़िन्दगी का सबक बन जाती हैं।

zindagI Kali jaise suru hoti hai aur पंखुड़ी ki tarah bikhar Kar khatam... #Zindagi  #Ki#Kahani