आँखे इतनी नशीली है ,जैसे कोई जाम हो मुस्कान इतनी मनमोहक है ,जैसे मुस्कान से ही कत्ल करने का इरादा हो चेहरा इतना खूबसूरत है ,जैसे बगिया में खिलता कोई गुलाब हो बिखरी जुल्फों और नैनो का संगम तो इतना कमाल का है जैसे सावन और बरसात का कोई अनूठा संगम हो होठो से जब निकलती है सुरीली आवाज ,मानो दिल सहसा थम सा जाता है सुनकर इतनी सुरिली आवाज इनकी कविताएं इतनी ज्ञानवान ,ऊर्जावान होती है जो बड़ी सहजता से समझा देती है सारे हालात सच कहूं तो प्रिया जी मुझको लगता है जैसे इस धरती पर आप साक्षात हो माँ सस्वती का अवतार #प्रिया गौर , #सुधा त्रिपाठी जी,#राजेश राजक जी,#कवि राहुल पाल जी ,#रेखा ह्रदय मंजुला,#अंकित सारस्वत जी, #सौरव तिवारीजी , ye kuch lines meri pyari bestiiiii ke liye #InspireThroughWriting