"शहर के बंद मकानों में..  ये डि..." Poetry By ikadashi tripathi | Nojoto

शहर के बंद मकानों में..  ये डिब्बों कैद खानों में.. एक फ्लैट में सुंदर आशियाना सजाया है.. तो फिर क्यों तुझे अपना वो पिछड़ा गांव याद आया है.. जिसे रोजगार की होड़ में तू अलविदा कह आया है.. तेरे गांव की बंजर भूमि पल पल गुहार लगाती है.. तड़प रही वो अन्य जल को.. बस तुझसे ही आस लगाती है.. कब तू गांव आएगा..अपनी धरती मां का ऋण चुकाएगा.. क्या भूल गया तू जन्मभूमि को..या आत्मदाह में आग लगाएगा.. मातृत्व की ममता छोड़..किया तूने परदेश बसेरा..  अब अकेले घुट रहा गांव में अब अस्तित्व मेरा.. मेरा ख्वाब है तू एक दिन जरूर आएगा.. अपने गांव की बंजर भूमि में..तू फिर बाहर लाएगा.. पुत्र होने का कर्तव्य बखूबी तू निभायेगा.. हां तू आएगा...गांव की बंजर भूमि में तू ही बाहर लाएगा... Follow ikadashi tripathi. Download Nojoto App to get real time updates about ikadashi tripathi & be part of World's Largest Creative Community to share Hindi Writing, Hindi Poetry, Hindi Quotes, Hindi Shayari, Hindi Poem, Hindi Jokes, Hindi Comedy, Hindi Memes, Hindi Stories, Hindi Whatsapp Status, Hindi Good Morning Status, Hindi Good Night Status, Art, Painting, Hindi Songs, Hindi Singing and Photography. A Creative expression platform. Poetry By ikadashi tripathi | Nojoto Poetry on Poetry. Poetry Poetry

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5 months ago

शहर के बंद मकानों में.. 
ये डिब्बों कैद खानों में..
एक फ्लैट में सुंदर आशियाना सजाया है..
तो फिर क्यों तुझे
अपना वो पिछड़ा गांव याद आया है..
जिसे रोजगार की होड़ में तू अलविदा कह आया है..
तेरे गांव की बंजर भूमि पल पल गुहार लगाती है.. तड़प रही वो अन्य जल को..
बस तुझसे ही आस लगाती है..
कब तू गांव आएगा..अपनी धरती मां का ऋण चुकाएगा..
क्या भूल गया तू जन्मभूमि को..या आत्मदाह में आग लगाएगा..
मातृत्व की ममता छोड़..किया तूने परदेश बसेरा..  अब अकेले घुट रहा गांव में अब अस्तित्व मेरा..
मेरा ख्वाब है तू एक दिन जरूर आएगा..
अपने गांव की बंजर भूमि में..तू फिर बाहर लाएगा.. पुत्र होने का कर्तव्य बखूबी तू निभायेगा..
हां तू आएगा...गांव की बंजर भूमि में तू ही बाहर लाएगा..

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Written By : ikadashi tripathi

my qualifications is b.com m.com now pursuing law ...now m a novel & stories writer

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