हवा-ए-गुलसिताँ,मौसम-ए-गुल हो, तर्ज़-ए-मोहब्बत तुम्हारा, अलहदा सा इज़हार,पल-पल याद दिलाएं वो निशानी प्यार की। 🌝प्रतियोगिता-114🌝 ✨✨आज की रचना के लिए हमारा शब्द है ⤵️ 🌹"वो निशानी"🌹 🌟 विषय के शब्द रचना में होना अनिवार्य नहीं है I कृप्या केवल मर्यादित शब्दों का प्रयोग कर अपनी रचना को उत्कृष्ट बनाएं I