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"वो आवाजें ज्यादा दुख देती है, जो आस पास से आती है

"वो आवाजें ज्यादा दुख देती है,
जो आस पास से आती है,
और अनसुनी रह जाती है..."

"विरह की पराकाष्ठा तो तब है,
जब पास में बैठा कोई ,
छूना चाहे,
छू ना पाए..."

" ये पीड़ा, विरह, खुशबू,
महसूस कर सकता हूँ,
इससे ये साफ है मीलॉर्ड,
मैं प्रेम में जीता हूँ "

#भृगुऋषि

©The Urban Rishi #Mic
"वो आवाजें ज्यादा दुख देती है,
जो आस पास से आती है,
और अनसुनी रह जाती है..."

"विरह की पराकाष्ठा तो तब है,
जब पास में बैठा कोई ,
छूना चाहे,
छू ना पाए..."

" ये पीड़ा, विरह, खुशबू,
महसूस कर सकता हूँ,
इससे ये साफ है मीलॉर्ड,
मैं प्रेम में जीता हूँ "

#भृगुऋषि

©The Urban Rishi #Mic