है हमारा दिल कहाँ आजकल, पता नहीं हम उनसे क्यों करते है प्यार, पता नहीं देखा था हमने उनको खिड़की से बाल बनाते क्या तभी से हो गया है हमको प्यार,पता नहीं उनको देख देखकर गजलें लिखी हमने इसकी है क्या उनको खबर, पता नहीं यूँ तो अनेकों गुल है इस गुलिस्तां में अब उन्ही पें क्यों ठहरी नजर, पता नहीं जानता था "अल्पज्ञ" सबब ए बर्बादी है मोहब्बत ये जानकार भी क्यों हो गया है प्यार, पता नहीं ✍️✍️✍️पवन कुमार अल्पज्ञ #पता_नहीं