जाने जिगर मेरी सीता,चलो आज राम तुमसे अपने जन्म पर दिल की बात है कहता हर युग में रूप बदल आता हूं कर्तव्यों का पाठ सिखलाता हूं। यूं तो सबकी रक्षा की पर पत्नी धर्म रह गया और यकीं मानों ये मर्यादा पुरुषोत्तम यूं तो जग भर पूजा गया पर तुम बिन जिगर मेरा भी। जीते जी मर गया। ©Smita Sapre #जयसियाराम #PoetInYou