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सुकून से बैठा था मैं भीड़ भरी तन्हाई में आके छेड़

सुकून से बैठा था मैं भीड़ भरी तन्हाई में
आके छेड़ दिया किसी अनजान इंसान ने 
खोया हुआ था जैसे किसी हसीन ख्याल में 
यादों को कसकर थामे उसी वीरान मयार में

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