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पर्दा करो क्योंकि तुम किसी बाप का ग़ुरूर हो, पर्द

पर्दा करो क्योंकि तुम किसी बाप का ग़ुरूर हो,

पर्दा करो क्योंकि तुम किसी भाई की ग़ैरत हो,

पर्दा करो क्योंकि तुम किसी शौहर की इज़्ज़त हो,

पर्दा करो क्योंकि तुम किसी घर की ज़ीनत हो,

पर्दा करो क्योंकि पर्दा हया का ज़ेवर है,

पर्दा करो क्योंकि पर्दे मे औरत की शान है,

पर्दा करो क्योंकि तुम कोई मामूली सामान नही हो,
 
बल्कि इस्लाम की शहज़ादी हो 
और कोई शहज़ादी इस तरह मामूली नही
ज़िसके उपर हर किसी की निगाह उठ जाये..

👌👌👌👌👌👌👌
मर्दो के लिए.....
निगाह नीची रखो - कि तुमसे तुम्हारी माँ की तरबियत की पहचान होगी, वही माँ जिसके क़दमों में जन्नत है।

निगाह नीची रखो - कि वो भी किसी की बहन है तुम्हारी बहन की तरह।

निगाह नीची रखो - कि तुम अपनी बीवी का एतबार, वफ़ा और ग़ुरूर हो, उसकी नज़रें नीची हो जाती है जब कोई उसे ताना देता है कि "हाँ पता है,तुम्हारे शौहर तुम्हें कितना चाहते हैं ?"

निगाह नीची रखो - कि तुम्हें अल्लाह ने औरतों पर क़व्वाम( संरक्षक,यानि अच्छी तरह रक्षा करने वाला ) बनाया है।

निगाह नीची रखो - कि ये शराफ़त की अलामत है।

निगाह नीची रखो - कि हुज़ूर, खलीफ़ा और सहाबा निगाह नीची रखते थे।

निगाह नीची रखो - क्योंकि तुम कोई मामूली इंसान नहीं, मुसलमान हो, इमानवाले हो, सबसे बेहतरीन उम्मह के पैरोकार हो।

निगाह नीची रखो - कि तुम इस्लाम के शहज़ादे हो, क़ुरआन में अल्लाह ने पहले मर्दों को निगाह नीची रखने को कहा है।

निगाह नीची रखो - ताकि ग़ैर मज़हब की औरतें कहें कि ईमानवाले मर्द कितने शरीफ होते हैं। मुसलमानों के मोहल्ले, गली,गाँव में हर औरत सुरक्षित है।
https://nojoto.com/post/2ca04e341d50ef352a46536523a36768/kal-naha-va-aaja-bha-ha-ma-jhasa-tha-ugdha-na-ra-j
निगाह नीची रखो - ताकि दंगों के बाद ग़ैर मजहब की औरतें इस बात की गवाही दें कि ईमानवाले मर्द, लड़ाई झगड़ों और दंगों में भी औरतों की इज़्ज़त का ख़याल करते ह
पर्दा करो क्योंकि तुम किसी बाप का ग़ुरूर हो,

पर्दा करो क्योंकि तुम किसी भाई की ग़ैरत हो,

पर्दा करो क्योंकि तुम किसी शौहर की इज़्ज़त हो,

पर्दा करो क्योंकि तुम किसी घर की ज़ीनत हो,

पर्दा करो क्योंकि पर्दा हया का ज़ेवर है,

पर्दा करो क्योंकि पर्दे मे औरत की शान है,

पर्दा करो क्योंकि तुम कोई मामूली सामान नही हो,
 
बल्कि इस्लाम की शहज़ादी हो 
और कोई शहज़ादी इस तरह मामूली नही
ज़िसके उपर हर किसी की निगाह उठ जाये..

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मर्दो के लिए.....
निगाह नीची रखो - कि तुमसे तुम्हारी माँ की तरबियत की पहचान होगी, वही माँ जिसके क़दमों में जन्नत है।

निगाह नीची रखो - कि वो भी किसी की बहन है तुम्हारी बहन की तरह।

निगाह नीची रखो - कि तुम अपनी बीवी का एतबार, वफ़ा और ग़ुरूर हो, उसकी नज़रें नीची हो जाती है जब कोई उसे ताना देता है कि "हाँ पता है,तुम्हारे शौहर तुम्हें कितना चाहते हैं ?"

निगाह नीची रखो - कि तुम्हें अल्लाह ने औरतों पर क़व्वाम( संरक्षक,यानि अच्छी तरह रक्षा करने वाला ) बनाया है।

निगाह नीची रखो - कि ये शराफ़त की अलामत है।

निगाह नीची रखो - कि हुज़ूर, खलीफ़ा और सहाबा निगाह नीची रखते थे।

निगाह नीची रखो - क्योंकि तुम कोई मामूली इंसान नहीं, मुसलमान हो, इमानवाले हो, सबसे बेहतरीन उम्मह के पैरोकार हो।

निगाह नीची रखो - कि तुम इस्लाम के शहज़ादे हो, क़ुरआन में अल्लाह ने पहले मर्दों को निगाह नीची रखने को कहा है।

निगाह नीची रखो - ताकि ग़ैर मज़हब की औरतें कहें कि ईमानवाले मर्द कितने शरीफ होते हैं। मुसलमानों के मोहल्ले, गली,गाँव में हर औरत सुरक्षित है।
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निगाह नीची रखो - ताकि दंगों के बाद ग़ैर मजहब की औरतें इस बात की गवाही दें कि ईमानवाले मर्द, लड़ाई झगड़ों और दंगों में भी औरतों की इज़्ज़त का ख़याल करते ह