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हर साल दोहराता है वही दर्द हर बार छूटता घर, आंगन

 हर साल दोहराता है वही  दर्द हर बार
छूटता घर, आंगन और मां का आंचल
पापा का कुछ ना कह कर सब कुछ करना 
मनपंसद चीजें चुपचाप लाकर रखना 
मां की डांट और फिकर ,
बुआ फिर कब आओगी  वाला मनुहार
सुकून देने वाला मायके का प्यार
हर साल वापस जाते हुए रुलाता है
और ग्यारह महीने हर रोज याद आता है

©Mamta Tripathi
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