काश ये सब झूठ होता, का

काश ये सब झूठ होता, काश ये सब झूठ होता।
ना कोई हिंदू, ना कोई मुस्लिम,
ना कोई सिख्ख, ईसाई होता।
जन्म लिया है मानव तन में
बस इक सच्चा मानव होता।
ना गरीब, अमीर ना कोई
ना कोई ऊंचा, नीचा होता।
ना होता कोई भेद भाव,
और ना कोई सरमिंदा होता।
ना होती फिर भ्रष्टाचारी,
और ना कोई रिश्वत लेता।
सुंदर, पावन,स्वक्ष, सुविकसित,
अपना भारत वर्ष होता।

©Kalpana Tomar
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