सामने बैठी वो मानो फूल रजनीगंधा , उसका गोरा मुखड़ा बादलों में छुपा चंदा।। वो जलती लपट और मैं पागल पतंगा, जब से देख तिल उसका मेरे दिल में हो गया पंगा।। #अंकित सारस्वत# #इश्क़्