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ग़ज़ल.... सूना है तुम्हारे शहर में कांटे बहुत है

ग़ज़ल....

सूना है तुम्हारे शहर में कांटे बहुत है
इस लिए तो दमन बचा कर चलते हैं

परेशान ना हो इस क़दर ऐ मेरे दोस्त
फिर भी हम तुझी से वफ़ा करते हैं

महसूस कर लेते हैं लोग धडकनों को
मैं हूं कि तेरी गलियों में आवाज़ दिया करते है

कर के तेरे वादे पे भरोसा ऐ मेरे दोस्त
हम तो तुझी से बात किया करते हैं 

छा जाता है अक्सर तेरी यादों का बादल
फिर भी हम बरसात के लिए तरसते हैं

©Ishrat Tauheed
  #Sheher

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