उसने फ्रिज खोला तों उसमे एक लेटर मिला ... ' ' मैम ' ' ..... बिना बताए जाने के लिए माफ़ करिएगा ...आप मेरी फ़िक्र ना करें ...पापा ने भेज दिया हैं हमें लेने के लिए कुछ लोगो को वो उसी jgh पर हमारा इंतज़ार कर rhe हैं ...हम उनके साथ जा rhe हैं ....हमारा ध्यान रखने के लिए शुक्रिया ...हम दुआ करेंगे आप के लिए ...कहते हैं हमारी दुआओ में bhut असर होता हैं .... ******* archu ने बार बार पढ़ा इसे पर समझ नहीं पाई कुछ .....कुछ देर बाद ...जब बाहर गईं ..पता चला उसे की कुछ किन्नर आए थे सुबह सुबह ....किसी को ढूंढ़ते हुए ..... archu का दिल बैठ गया ....समझ गईं वो एक पल में .... और महीनो उस मासूम का चेहरा घूमता रहा दिल और दिमाग में ...ये बात किसी को नहीं बता पाई वो ...पति से भी ...कैसे कहती ...की वो बच्ची इंसा नहीं हैं ...कोई वजूद नहीं हैं उसका ....किन्नर हैं वो ...उसके पति पुरुष हैं ...वो महिला हैं ...उनका , उनके बच्चों का वजूद हैं ...अस्तित्व हैं पर ....उस बच्ची का नहीं ...क्यूँ ?