शीर्षक: "दीवाली बनी तब विरहन की" "ठहरी- भटकी, मै | हिंद

शीर्षक: "दीवाली बनी तब विरहन की"

"ठहरी- भटकी, मैं विरहन सी
हूँ उर्मिला, अपने लक्ष्मण की..!!

जल प्रीत, दीप संग बैठी
चौदह बरस,विरहा उलझन सी..!!

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