Unsplash हम फूल समझ बैठे थे काँटों की बस्तियों को, ख़ुद पर ही हमेशा यूँ सितम बेशुमार किया। तेरी ही तमन्ना में खोए रहे उम्र भर, साया भी न छोड़ा जब तुझसे प्यार किया। ©Shailendra Gond kavi #traveling #Shailendra_Gond_kavi #Nojoto #Shayari