मिलकर बिछड़ना कोई, तकदीर बताता रहा..! मैं संग उसक

 मिलकर बिछड़ना कोई,
तकदीर बताता रहा..!

मैं संग उसके मुस्कुराती,
तस्वीरें निहारता रहा..!

जाने वाले को रोक न सका,
मासूम ये दिल मेरा..!

हरपल हरदम जिसे कभी ये,
यूँ ही ख़ुदा पुकारता रहा..!

सुख का समुन्दर सूख गया कैसे,
ये सवाल ज़हन को ज़हन्नुम बनाता रहा..!

रिश्तों की डोर करके कमज़ोर,
ज़ालिम झूठी कसमें खाता रहा..!

मरते रिश्तों को किस्तों में बाँट,
ज़ुल्म-ओ-सितम ढाता रहा..!

©SHIVA KANT(Shayar)
  #Alive #milkarbichhadna
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