"हमें चलने का भी हुनर नहीं; समन..." Poetry By तितली | Nojoto

हमें चलने का भी हुनर नहीं; समन्दर की गोद मयस्सर हो गई।। यूँ तो मैं दिखता हूँ संजीदा ही; पर बेखबर हूँ तुझे खबर हो गई।। आसमां के दरख़्त से लगता रहा डर मुझे; तू मिली मेरा पर हो गई।। खामोश ही बैठा रहा जिंदगी के कोने में; तूने रुख मोड़ा ये शहर हो गई।। गिरा रखे थे चन्द परदे हमने किरदार के; तूने छुवा जरा सा नजर हो गई।। मुझे लगता था कि मिट जायेगी हस्ती हमारी; तूने कलम को पकड़ा ये अमर हो गई।। वक़्त की खबर ही कहाँ हमें; मेरा तू हर पहर हो गई।। मैं तो बस 'अंश' हूँ जीवन का; मुझे पूरा करने में 'हर' हो गई।। #तितली #titli#Mylove#life#Gajal#nojoto#love. Follow तितली. Download Nojoto App to get real time updates about तितली & be part of World's Largest Creative Community to share Writing, Poetry, Quotes, Art, Painting, Music, Singing, and Photography; A Creative expression platform. Poetry By तितली | Nojoto Poetry on Poetry, Life, Love, Nojoto, mylove, TiTLi, gajal, तितली. Poetry Poetry, Life Poetry, Love Poetry, Nojoto Poetry, mylove Poetry, TiTLi Poetry, gajal Poetry, तितली Poetry

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3 months ago

#titli#Mylove#life#Gajal#nojoto#love

हमें चलने का भी हुनर नहीं;
समन्दर की गोद मयस्सर हो गई।।
यूँ तो मैं दिखता हूँ संजीदा ही;
पर बेखबर हूँ तुझे खबर हो गई।।
आसमां के दरख़्त से लगता रहा डर मुझे;
तू मिली मेरा पर हो गई।।
खामोश ही बैठा रहा जिंदगी के कोने में;
तूने रुख मोड़ा ये शहर हो गई।।
गिरा रखे थे चन्द परदे हमने किरदार के;
तूने छुवा जरा सा नजर हो गई।।
मुझे लगता था कि मिट जायेगी हस्ती हमारी;
तूने कलम को पकड़ा ये अमर हो गई।।
वक़्त की खबर ही कहाँ हमें;
मेरा तू हर पहर हो गई।।
मैं तो बस 'अंश' हूँ जीवन का;
मुझे पूरा करने में 'हर' हो गई।।
#तितली

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तितली

Written By : तितली

तितली;हस्ताक्षर है एहसास का।एहसास के हस्ताक्षर नहीं मिल पाते हैं आसानी से।मिल जाये तो उभरते नही हैं।आइये हम सभी उस हस्ताक्षर को महसूस करते हैं अपने-अपने रंग में।।

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