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चाँद का सिघाँर था, जिस रात का मुजको ईंतजार था । गु

चाँद का सिघाँर था, जिस रात का मुजको ईंतजार था ।
गुलाबो सि महेकी थी, मेहंदी उसके हात लगी थी। 
फरक इतना था, 
दुल्हन थी वह दुल्हा कोई और था। 
चांदनी रात में चाँद 
घटता जारा था, 
मेरा हात उसके हात 
से चुटता जारा था #चाँद
चाँद का सिघाँर था, जिस रात का मुजको ईंतजार था ।
गुलाबो सि महेकी थी, मेहंदी उसके हात लगी थी। 
फरक इतना था, 
दुल्हन थी वह दुल्हा कोई और था। 
चांदनी रात में चाँद 
घटता जारा था, 
मेरा हात उसके हात 
से चुटता जारा था #चाँद
musiclt0486

Tohid Mulla

Growing Creator