सुनो प्रिय...! बस इतना है कहना राधा / रुकमिनि / मीरा सीता / या फिर सती या पार्वती मैं कुछ भी बनूँ... तुम बस शिव ही रहना... कृष्ण सा प्रेम तो हो राम सा मर्यादा भी रहे पर साथ देना तो बस शिव सा..। अनादिकाल तक बस तुम ही रहना जब आवे विरह की बेला मेरे वियोग में तुम समाधिस्त हो जाओ जब भी होना हो तुमसे दूर सहन करनी पड़े अनादि से अंत की पीड़ा मैं हो जाऊँ शून्य में विलीन जलती रहूँ तुम्हारे अनंत राग में धधकती अग्नि में और तुम उस वेदना को लिये संसार से परे इक नवीन ऊर्जा के लिये मेरे वियोग में चुनना तप / समाधि कुछ भी बनूँ मैं तुम शिव बनकर देना मेरा साथ। ©Shipra Pandey ''Jagriti' #mahashivaratri