~~~~~~~~~~~~~~~~~ 🌟🌟 कृष्ण - वाणी 🌟🌟 ~~~~~~~~~~~~~~~~~~ खेल का रचेता नहीं , पूरा का पूरा खेल हूँ मैं प्रीत संग जो रीत रचाई , वोह मीत हूँ मैं कर्ण-कर्ण में बसा हूँ तेरे , मेरे धर्मरक्षक पार्थ जो लहराती है फसलें 🌾🌾 सुबह-शाम , उसका बीज हूँ मैं 🌼 🌼 🌼 🌼 🌼 🌼 🌼 🌼 🌼 🌼 🌼 🌼 🌼 🌼 ©Sethi Ji जो धर्म का रास्ता देखिए वोह कृष्णा कहलता है जो अधर्म का नाश करें वोह अर्जुन हो जाता हैं लहराती है नदियाँ जैसे शिव-शक्ति का हो रहा मिलना