सबकी ख्वाहिशें पूरी करते-करते अपनी ख्वाहिशें भूल गए, पहले उड़ते थे आजाद परिंदों से अब जिम्मेदारियों में बंँध गए। ख्वाहिशें आधी-अधूरी सही पर टूटे हुए सपने आज भी जिंदा हैं, पूरी करेंगे हर ख्वाहिश अपनी हम खुद पर नहीं शर्मिंदा हैं। ♥️ Challenge-585 #collabwithकोराकाग़ज़ ♥️ इस पोस्ट को हाईलाइट करना न भूलें :) ♥️ विषय को अपने शब्दों से सजाइए। ♥️ रचना लिखने के बाद इस पोस्ट पर Done काॅमेंट करें।