"सुनो ! मेरे अर्धनारीश्वर ...!!" (शेष अनुशीर्षक में ) स्त्री (प्रकृति) जब रोती है सिसकियों से धरती की छाती फटती है और दरारें मृत घाटी बन कर पूरी दुनिया को लीलने लगती है।