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White तुम्हारी स्मृतियों का ताना-बाना, कुछ अजीब सा

White तुम्हारी स्मृतियों का ताना-बाना,
कुछ अजीब सा है।
बुनता रहा मैं रात-दिन,
फिर भी यह उलझा रहा।
।।क्रमशः।।

©Dinesh Kumar Pandey  hindi poetry
White तुम्हारी स्मृतियों का ताना-बाना,
कुछ अजीब सा है।
बुनता रहा मैं रात-दिन,
फिर भी यह उलझा रहा।
।।क्रमशः।।

©Dinesh Kumar Pandey  hindi poetry