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कुछ बनने की ख्वाहिश थी मेरी उसको सही दिशा दी अपने

कुछ बनने की ख्वाहिश थी मेरी 
उसको सही दिशा दी अपने ,
आसमान में उड़ने की ख्वाहिश थी
तो पंख दिए अपने ,
क्या कहूं सब कम है ,गुरु के आगे सब 
नत मस्तक है  ,एक कच्चे घड़े को 
पका कर उसे उसे सही आकार दिया अपने
मेरे सभी शिक्षकों को हृदय से                  शिक्षक दिवस की ढेर सारी शुभकामनाएं।। 
#RJ ANSH#

©Anshul srivastava
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