वो सवाली सी निगाहें, वो बहकी सी हरक़त, कहीं तैर रही थीं, बड़ी हड़बड़ी में, शायद किसी फ़िक्र में.... ना जाने किस फ़िराक में रूबरू हुई थीं मुझसे, ना जाने कौन से थे सवाल तुम्हारे। याद है मुझे वो अंदाज़-ए-ज़हमत, और कुछ कहते कहते, फिर रुक सा जाना। यकीं करो, पर अभी इक रोज़ नींद ने आँखों पर दस्तक नहीं दी, उन सवालों के बीच इक सवाल मेरा भी पूछने आया..... के इस कद्र काबिल-ए-फ़िक्र, मैं था ही क्यों.....?? #काबिल #फ़िक्र #yqdidi1 #yqbaba☺ #yqbhaijan....... सवाल........