मकड़ी का जाला दिखता है, कमलेश हम फंसे हैं जिसमें वह है अदृश्य जाला ओस में भी चमकता सा लगता है चमके तब भी, जब पड़ता है सूर्य का उजाला ©Kamlesh Kandpal #Jala