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ख़त्म क्यों हो न पाई ग़रीबी ? आज भी है ग़रीबी ग़री

ख़त्म क्यों हो न पाई ग़रीबी ?
आज भी है ग़रीबी ग़रीबी ||
आपकी सादगी सादगी है |
सादगी है हमारी ग़रीबी ||
आदमी कुछ भी कर बैठता है |
जब कभी भी सताती ग़रीबी ||
उम्र से लग रहा है वो बूढ़ा |
ओढ़ उसने जो रक्खी ग़रीबी ||
बेटियों की तरफ़ देखता हूँ |
नोचती मुझको मेरी ग़रीबी ||
बात बढ़- बढ़ के सब बोलते हैं |
क्या किसी ने हटा दी ग़रीबी ?
मर गया वो ग़रीबी में आख़िर |
पर न मर पाई उसकी ग़रीबी ||
अपने अख़लाक़ से गिर न जाऊं |
इससे अच्छी है प्यारी ग़रीबी ||
काम आती सियासत में अक्सर |
ये हमारी तुम्हारी ग़रीबी ई
ख़त्म क्यों हो न पाई ग़रीबी ?
आज भी है ग़रीबी ग़रीबी ||
आपकी सादगी सादगी है |
सादगी है हमारी ग़रीबी ||
आदमी कुछ भी कर बैठता है |
जब कभी भी सताती ग़रीबी ||
उम्र से लग रहा है वो बूढ़ा |
ओढ़ उसने जो रक्खी ग़रीबी ||
बेटियों की तरफ़ देखता हूँ |
नोचती मुझको मेरी ग़रीबी ||
बात बढ़- बढ़ के सब बोलते हैं |
क्या किसी ने हटा दी ग़रीबी ?
मर गया वो ग़रीबी में आख़िर |
पर न मर पाई उसकी ग़रीबी ||
अपने अख़लाक़ से गिर न जाऊं |
इससे अच्छी है प्यारी ग़रीबी ||
काम आती सियासत में अक्सर |
ये हमारी तुम्हारी ग़रीबी ई
saddamhussain3514

Saddam

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