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23 साल का युवक फांसी पर चढ़ा रहा था 62 साल का बु

23 साल का युवक फांसी पर चढ़ा रहा था 
 62 साल का बुड्ढा तमाशा देख रहा था !

वह युवा आज भी क्रांतिकारी कहलाता है
 और वह बुड्ढा राष्ट्पिता कहलाता है !

वैसे भी राष्ट्र के पिता नहीं होते सपूत होते हैं 
अच्छा हुआ भगत सिंह तेरा चेहरा नहीं है नोटों पर !

वरना कुचला जाता तू भी मुन्नी और शीला के कोठों पर 
तू था और रहेगा वीरों के दिलों में 
रहने दे गांधी को नोटों पर !

तू शहीद हुआ जाने कैसे तेरी मां सोई होगी 
एक बात तो तय है तुझे गले लगयाकर रस्सी भी रोई होगी !

                                                          चैतन्य
23 साल का युवक फांसी पर चढ़ा रहा था 
 62 साल का बुड्ढा तमाशा देख रहा था !

वह युवा आज भी क्रांतिकारी कहलाता है
 और वह बुड्ढा राष्ट्पिता कहलाता है !

वैसे भी राष्ट्र के पिता नहीं होते सपूत होते हैं 
अच्छा हुआ भगत सिंह तेरा चेहरा नहीं है नोटों पर !

वरना कुचला जाता तू भी मुन्नी और शीला के कोठों पर 
तू था और रहेगा वीरों के दिलों में 
रहने दे गांधी को नोटों पर !

तू शहीद हुआ जाने कैसे तेरी मां सोई होगी 
एक बात तो तय है तुझे गले लगयाकर रस्सी भी रोई होगी !

                                                          चैतन्य
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