नफरत की हवायें जो धीरे-धीरे चलने लगी हैं अपने मुल्क में फिर भी मुहब्बत की इक लौ जलाये हुए हैं अपने मुल्क में भटकते हुए किस विरानी में आये हुए हैं हमसे मत पुछो कहाँ जाये किधर जाये अब तुम बताओ अपने मुल्क में आँखों में जो खुशी लेकर निकलते थे हम अपने घर से लोग हम को नफरत की निगाह से देखते हैं अपने मुल्क में क्यूँ अब भला फिर से वही माहौल धीरे-धीरे बन रहा हैं लोगों के दिलों में ये कैसा दहशत बसा हैं अपने मुल्क में नफरत की हवायें धीरे-धीरे मुहब्बत में बदल जायेगी मगर सर्त हैं आरिफ से भी कोई प्यार करें अपने मुल्क में ।।। नफरत की हवायें जो धीरे-धीरे चलने लगी हैं अपने मुल्क में फिर भी मुहब्बत की इक लौ जलाये हुए हैं अपने मुल्क में भटकते हुए किस विरानी में आये हुए हैं हमसे मत पुछो कहाँ जाये किधर जाये अब तुम बताओ अपने मुल्क में आँखों में जो खुशी लेकर निकलते थे हम अपने घर से लोग हम को नफरत की निगाह से देखते हैं अपने मुल्क में