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अल्फ़ाज़ मेरे दिल के, अल्फाज मेरे दिल के तन्हाईयाँ

अल्फ़ाज़ मेरे दिल के, अल्फाज मेरे दिल के 
तन्हाईयाँ जो लिखी थी हमने 
सोचा न था कभी की नज़रो के सामने रहोगी
हमारे पर 
हम दिल - ऐ - अल्फाज बयान ना 
कर पाएँगे ।

चाहना तो हम मे भी बहुत खूब लिखा है
दिल - ऐ - दर्खाश्त, दरमीयाँ....  
दिल भले मेरा जख्मी है, लेकिन सांसो में अब भी मगरूरी है 
 मुर्खते - ऐ - जुबाने खारोफ कभी ऐहसास 
 दिला  न पाएँगे हम । ग
अल्फ़ाज़ मेरे दिल के, अल्फाज मेरे दिल के 
तन्हाईयाँ जो लिखी थी हमने 
सोचा न था कभी की नज़रो के सामने रहोगी
हमारे पर 
हम दिल - ऐ - अल्फाज बयान ना 
कर पाएँगे ।

चाहना तो हम मे भी बहुत खूब लिखा है
दिल - ऐ - दर्खाश्त, दरमीयाँ....  
दिल भले मेरा जख्मी है, लेकिन सांसो में अब भी मगरूरी है 
 मुर्खते - ऐ - जुबाने खारोफ कभी ऐहसास 
 दिला  न पाएँगे हम । ग