White लोगों के ताने अब बड़े मनमाने हुए जमाने में अब बस अपने काम से काम रखने लगा हूँ कुछ जलन से जलने लगे हैं अपने मुझ से बुझाने को जुबां पर बस प्रणाम रखने लगा हूँ मेरे बेबाक से अंदाज पर उन्हें शिकायत थी खुश रखने को जुबां पर लगाम रखने लगा हूँ भरोसा टूटा है सही की राह चलते चलते अब झूठ पर भी कुछ एहतराम रखने लगा हूँ जिंदगी बीत गई बहुत बेमतलब की अब तक रब से सामना कैसा होगा अनुमान रखने लगा हूँ इंसानियत रौंद कर कंकड़ पत्थर बटोरे मैने अब जहां से रुखशती का सामान रखने लगा हूँ जमीर बिक रहे बाजार में खड़ा हूँ अंबुज अपने ईमान पर कुछ यूं गुमान रखने लगा हू ©अंबिका अनंत अंबुज #Sad_shayri