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पुष्प मेरे पुष्प को तोड़ कर तूने मुझे खरोच दिया

पुष्प

मेरे पुष्प को तोड़ कर तूने मुझे खरोच दिया

मेरे खूबसूरती को तोड़ कर यू ही फेक दिया

भौंरे जो चक्कर लगाते थे मेरे उसने भी चक्कर लगाना छोड़ दिया 

नाज थी मेरी खूबसूरती पे जो तूने यूं ही तोड़ दिया 

मेरी उस खुशबू की वजह से लोग थे यहां बैठते उन्होंने भी बैठना छोड़ दिया

तूने तो मेरी खूबसूरती को यूं ही तोड़ कर फेक दिया 

मेरी उस खूबसूरती पे आते थे बच्चे उन्होंने भी आना छोड़ दिया

मेरे पुष्प को  तोड़ कर तूने मुझे निचोड़ दिया

©Abu Sufiyan Qaisar कविता
पुष्प

मेरे पुष्प को तोड़ कर तूने मुझे खरोच दिया

मेरे खूबसूरती को तोड़ कर यू ही फेक दिया

भौंरे जो चक्कर लगाते थे मेरे उसने भी चक्कर लगाना छोड़ दिया 

नाज थी मेरी खूबसूरती पे जो तूने यूं ही तोड़ दिया 

मेरी उस खुशबू की वजह से लोग थे यहां बैठते उन्होंने भी बैठना छोड़ दिया

तूने तो मेरी खूबसूरती को यूं ही तोड़ कर फेक दिया 

मेरी उस खूबसूरती पे आते थे बच्चे उन्होंने भी आना छोड़ दिया

मेरे पुष्प को  तोड़ कर तूने मुझे निचोड़ दिया

©Abu Sufiyan Qaisar कविता