वो क्या ही हमें समजेंगे जिन्होंने हमें जाना नहीं। दस्तूँर ये दुनियाँ का शौक़ से सिखेंगे ही। यूही नहीं परिंदे आसमान छू लेते है हो ऐतबार खूद पें तो मंजिल तुम्हारीं होगी। हुऩर सिख लो खुद पे भरोसा करने का सहारें कितने भी भरोंसेमंद हो एक दिन साथ छोड़ ही जाते है। अखिर किनारा कितना भी दूर हो समुंदर का कष्टी को पार करना ही पडता है। कोशिश करते रहेंगे खूद के दम पर जिने की कमजोर हमारा वक्त है और हम वक्त के मोहताज नहीं। ©Aish saxena ##mohtaaj #tanha