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परी' थोड़ी सी जो सयानी हुई, मानों सबकी नानी हुई, प

परी' थोड़ी सी जो सयानी हुई, मानों सबकी नानी हुई,
पैर हो गए 'पर' उसके, अब अपने मन की रानी हुई।
दौड़ना -कूदना, खेलते रहना, 
नखड़े भी अनेकों उसपर,मानो अब हावी हुई।
कुछ ऐसे नटखटपन रोम -रोम में भरे थे उसके,
अब वो पूरे मुहल्ले की शहजादी हुई।
कहने क्या थे?
कभी दौड़ यहां, कभी वहां, कभी इसके घर, कभी उसके घर,
बच्चे तो बच्चे ठहरे, दोस्ती सबसे बनाई,
परी हीं तो थी, अपने नादानी से वो, हर किसी के दिल में थी समायी।।
किसी का दिल नहीं लगता कभी, गर वो न आती थी,
लोग ढूंढने पहोचते घर उसके, सबको इतना वो भाती थी।
कभी उछल इनके गोद तो कभी उछल उनके गोद, अक्सर हीं बैठ जाती थी,
दादा मुझे ये कहानी सुननी है आज, आप सुनाओ न,
दादी आप भी कुछ बताओ न,
चाची आज खाना क्या बनाई, मुझे भी खिलाओ न,
चाचू आप ऐसे परेशान क्यूं करते मुझे, 
मुझे आज चॉकलेट खाना है, आप बाजार से ले आओ न।
हर किसी से मिलती जुलती, हर किसी का हाल पूछती,
हर किसी से न जानें कितने -कितने सवाल पूछती।
मासूम सी थी, नादान सी दिखती थी,
बच्चों के साथ जब भी खेलती, सैतान सी दिखती थी।
जाहिर सी बात है, किसी का दिल कैसे न लगता,
जब बच्चे हों नटखट, मानों उसमें जान है बसता।।
आगे क्या....

©dashing raaz कहानी परी की

भाग - 4

पढ़े ज़रूर और प्रतिक्रिया देना न भूलें।

#परी #Angel #angelwithhorn #हिंदी #Hindi #कविता #poem #हिंदीशायरी #hindi_poetry #hindi_shayari  ऋतेष  Manik Sheikh enjoy life Dr jyotsna singh Rajawat Anita Sahani
परी' थोड़ी सी जो सयानी हुई, मानों सबकी नानी हुई,
पैर हो गए 'पर' उसके, अब अपने मन की रानी हुई।
दौड़ना -कूदना, खेलते रहना, 
नखड़े भी अनेकों उसपर,मानो अब हावी हुई।
कुछ ऐसे नटखटपन रोम -रोम में भरे थे उसके,
अब वो पूरे मुहल्ले की शहजादी हुई।
कहने क्या थे?
कभी दौड़ यहां, कभी वहां, कभी इसके घर, कभी उसके घर,
बच्चे तो बच्चे ठहरे, दोस्ती सबसे बनाई,
परी हीं तो थी, अपने नादानी से वो, हर किसी के दिल में थी समायी।।
किसी का दिल नहीं लगता कभी, गर वो न आती थी,
लोग ढूंढने पहोचते घर उसके, सबको इतना वो भाती थी।
कभी उछल इनके गोद तो कभी उछल उनके गोद, अक्सर हीं बैठ जाती थी,
दादा मुझे ये कहानी सुननी है आज, आप सुनाओ न,
दादी आप भी कुछ बताओ न,
चाची आज खाना क्या बनाई, मुझे भी खिलाओ न,
चाचू आप ऐसे परेशान क्यूं करते मुझे, 
मुझे आज चॉकलेट खाना है, आप बाजार से ले आओ न।
हर किसी से मिलती जुलती, हर किसी का हाल पूछती,
हर किसी से न जानें कितने -कितने सवाल पूछती।
मासूम सी थी, नादान सी दिखती थी,
बच्चों के साथ जब भी खेलती, सैतान सी दिखती थी।
जाहिर सी बात है, किसी का दिल कैसे न लगता,
जब बच्चे हों नटखट, मानों उसमें जान है बसता।।
आगे क्या....

©dashing raaz कहानी परी की

भाग - 4

पढ़े ज़रूर और प्रतिक्रिया देना न भूलें।

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