Maligram Yadav

Maligram Yadav Lives in Varanasi, Uttar Pradesh, India

Aim of life is to give

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"क्यों बनाते हो मजाक गरीबों का, यह वही है जो नई ढाँचा दिया है विश्व का । प्रत्येक पंचवर्षीय में इनके यहाँ ही खा कर सत्ता में जाते हो, और फिर इन्ही पर रोब जमाते हो । भूल क्यों गये वो इतिहास, जब हुआ करता था गरीबों का राज। उनको नही है अपनी क्षमताओं का अहसास, इसीलिए तो तुम करते ही शोषण करने का अक्षम्य अपराध। जिस दिन वो होश में आएंगे संसार का नव निर्माण कर जायेंगे। क्यों भूल गए तुम हिटलर के जुल्म को, और दशरथ माझी के हथरों के प्रहार को। माना कि वो है मुर्ख, अनपढ़, नादान, पर तुम तो हो पढ़े लिखे विद्वान । वो दुनियां को बदलने की क्षमता रखते है, इसीलिए तो इतने संयम से रहते है । सुनो उनकी ख़ामोशी का हुँकार, और करो तैयारी देने का उनका अधिकार । जो निर्माण करने की क्षमता रखते है, वो विध्वंश करने का भी सामर्थ रखते हैं । लेखक :- मालीग्राम यादव"

क्यों  बनाते हो मजाक गरीबों का,
यह वही है जो नई ढाँचा दिया है विश्व का ।
प्रत्येक पंचवर्षीय में इनके यहाँ ही खा कर सत्ता में जाते हो,
और फिर इन्ही पर रोब जमाते हो ।

भूल क्यों गये वो इतिहास,
जब हुआ करता था गरीबों का राज।
उनको नही है अपनी क्षमताओं का अहसास,
इसीलिए तो तुम करते ही शोषण करने का अक्षम्य अपराध।

जिस दिन वो होश में आएंगे
संसार का नव निर्माण कर जायेंगे।
क्यों भूल गए तुम हिटलर के जुल्म को,
और दशरथ माझी के हथरों के प्रहार को।

माना कि वो है मुर्ख, अनपढ़, नादान,
पर तुम तो हो पढ़े लिखे विद्वान ।
वो दुनियां को बदलने की क्षमता रखते है,
इसीलिए तो इतने संयम से रहते है ।

सुनो उनकी ख़ामोशी का हुँकार,
और करो तैयारी देने का उनका अधिकार ।
जो निर्माण करने की क्षमता रखते है,
वो विध्वंश करने का भी सामर्थ रखते हैं ।

                             लेखक :- मालीग्राम यादव

#sunlight

146 Love

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"दोस्ती गैरों में अपनों की तलाश है दोस्ती, अपनों से दूर अपनों की अहसास है दोस्ती । कुछ दोस्त होते हैं बहुत खास, जिसे रखते हैं संजो कर दिल के पास । जिन्दगी जीना सीखाती है दोस्ती, सुखों और दुखों में साथ निभाती है दोस्ती । जिन्दगी में सिर्फ एक ही रिश्ता तो बनाता है इंसान, बाँकी सभी रिश्ते तो बनाते हैं भगवान । पतझरों की मौसम में वसंत सी हरियाली है दोस्ती, डूबती हुई जीवन रूपी नईया की, तिनका रूपी सहारा है दोस्ती। मिलते हैं जिंदगी में दोस्त अनेक, सीखा जाते हैं जिन्दगी जीनें के सलिखे अनेक। लेखक :- मालीग्राम"

दोस्ती

गैरों में अपनों की तलाश है दोस्ती,
अपनों से दूर अपनों की अहसास है दोस्ती ।
कुछ दोस्त होते हैं बहुत खास,
जिसे रखते हैं संजो कर दिल के पास ।

जिन्दगी जीना सीखाती है दोस्ती,
सुखों और दुखों में साथ निभाती है दोस्ती ।
जिन्दगी में सिर्फ एक ही रिश्ता तो बनाता है इंसान,
बाँकी सभी रिश्ते तो बनाते हैं भगवान ।

पतझरों की मौसम में वसंत सी हरियाली है दोस्ती,
डूबती हुई जीवन रूपी नईया की, तिनका रूपी सहारा है दोस्ती।
मिलते हैं जिंदगी में दोस्त अनेक,
सीखा जाते हैं जिन्दगी जीनें के सलिखे अनेक।
                        
                            लेखक :- मालीग्राम

#sunlight

135 Love

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"गुरु गुरु वही है जो आपकी आपसे पहचान करा दे, जो एक मामूली सा पत्थर में भी भगवान त्रास दे। जिंदगी में तो मिलें हैं लोग भरमार लेकिन थे आप बहुत खास, जिन्होंने कराया मुझे, मेरी छुपी हुई शक्तियों का अहसास। आपने ही साहित्य में आध्यात्म दिखलाया, बाहरी समस्याओं का हल खुद के अंदऱ खोजना सिखलाया। आपने ही मुझे सही राहों पर चलना सिखलाया, हारने के बाद भी जीवन में जितना सिखलाया । आपका वो मैकबेथ का soliloque पढना, पोर्टल scene में अपने गाँव का कहानी सुनाना। साहित्य के अंदर ही जीवन का मर्म बताना, बहुत याद आती है आज । क्लास के बाद डिपार्टमेंट में साहित्य के साथ - साथ जीवन रूपी समस्याओं पर चर्चा करना, शाम के समय घर बुलाकर पढाई के साथ-साथ माँ के हाथों का प्रसाद खिलाना। आपका सप्ताह में तीन दिन स्पेशल लेंगवेज का क्लास, बहुत याद आती है आज । आपने मेरी साहित्य की यात्रा चम्पक नामक मैगजिन से करवाया, आपने एक मेंटर नामक क्लास चलाया, जिसमें मुझे, मेरे जीवन का लक्ष्य बताया । आप ही ने मुझे खुद को खुद से मिलवाया । अब मेरा भी एक अडिग- अटल इच्छा है, मैं आपके जैसा बन जाऊं । और दूसरों का उपकार करूँ, साहित्य को आध्यात्म की तरह पढ़ा पाऊँ । आपका शिष्य - मालीग्राम "

गुरु 

गुरु वही है जो आपकी आपसे पहचान करा दे,
जो एक मामूली सा पत्थर में भी भगवान त्रास दे।
जिंदगी में तो मिलें हैं लोग भरमार लेकिन थे आप बहुत खास,
जिन्होंने कराया मुझे, मेरी छुपी हुई शक्तियों का अहसास।

आपने ही साहित्य में आध्यात्म दिखलाया,
बाहरी समस्याओं का हल खुद के अंदऱ खोजना सिखलाया।
आपने ही मुझे सही राहों पर चलना सिखलाया,
हारने के बाद भी जीवन में जितना सिखलाया ।

आपका वो मैकबेथ का soliloque पढना,
पोर्टल scene में अपने गाँव का कहानी सुनाना।
साहित्य के अंदर ही जीवन का मर्म बताना,
बहुत याद आती है आज ।

क्लास के बाद डिपार्टमेंट में साहित्य के साथ - साथ जीवन रूपी समस्याओं पर चर्चा करना,
शाम के समय घर बुलाकर पढाई के साथ-साथ माँ के हाथों का प्रसाद खिलाना।
आपका सप्ताह में तीन दिन स्पेशल लेंगवेज का क्लास,
बहुत याद आती है आज ।

आपने मेरी साहित्य की यात्रा चम्पक नामक मैगजिन से करवाया,
आपने एक मेंटर नामक क्लास चलाया,
जिसमें मुझे, मेरे जीवन का लक्ष्य बताया ।
आप ही ने मुझे खुद को खुद से मिलवाया ।

अब मेरा भी एक अडिग- अटल इच्छा है,
मैं आपके जैसा बन जाऊं ।
और दूसरों का उपकार करूँ,
साहित्य को आध्यात्म की तरह पढ़ा पाऊँ ।
                   आपका शिष्य - मालीग्राम

#feather

134 Love

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"ऐ कवि कविता नही अपने मन की व्यथा लिखो, आज लिखो और कल लिखो । आने वाली पीढ़ियों की नई दिशा लिखो, ऐ कवि कविता नही अपने मन की व्यथा लिखो। लिखते हो क्या महलों को झोपड़ियों की किस्सा लिखो, किसानों की दुर्दसा लिखो । गरीबों की चिंता लिखो, ऐ कवि कविता नही अपने......... नेताओं की मनोकांछा लिखो, देश द्रोहियों की गद्दारी लिखो। मिडिया की चतखोरी लिखो, ऐ कवि कविता नही अपने........ लिखते हो क्या धर्मों को मानवता प्रन्सशा लिखो, आनेवाली पीढ़ियों के लिए शिक्षा का उद्देश्य लिखो। ऐ कवि कविता नही दुनिया के लिए नई दिशा लिखो, ऐ कवि कविता नहीं अपने............. चाँद और मंगल के साथ - साथ धरती से जुड़े रहने की महत्वकांछा लिखो, आधुनिकता के साथ - साथ प्राचीनता की कथा लिखो। इस परायी सी दुनिया में अपनों की दशा लिखो, ऐ कवि कविता नहीं अपने............... इस कम्प्यूटर की दुनियां में दादी- नानी के किस्से लिखो, अपनी सभ्यता और संस्कृति को बचाने के लिए कुछ ऐसा लिखो। आने वाली पीढ़ियों के लिए नई दिशा लिखो, ऐ कवि कविता नही अपने मन की व्यथा लिखो। रचयिता- मालीग्राम यादव"

ऐ कवि कविता नही अपने मन की व्यथा लिखो,
आज लिखो और कल लिखो ।
आने वाली पीढ़ियों की नई दिशा लिखो,
ऐ कवि कविता नही अपने मन की व्यथा लिखो।

लिखते हो क्या महलों को झोपड़ियों की किस्सा लिखो,
किसानों की दुर्दसा लिखो ।
गरीबों की चिंता लिखो,
ऐ कवि कविता नही अपने.........

नेताओं की मनोकांछा लिखो,
देश द्रोहियों की गद्दारी लिखो।
मिडिया की चतखोरी लिखो,
ऐ कवि कविता नही अपने........

लिखते हो क्या धर्मों को मानवता प्रन्सशा लिखो,
आनेवाली पीढ़ियों के लिए शिक्षा का उद्देश्य लिखो।
ऐ कवि कविता नही दुनिया के लिए नई दिशा लिखो,
ऐ कवि कविता नहीं अपने.............

चाँद और मंगल के साथ - साथ धरती से जुड़े रहने की महत्वकांछा लिखो,
आधुनिकता के साथ - साथ प्राचीनता की कथा लिखो।
इस परायी सी दुनिया में अपनों की दशा लिखो,
ऐ कवि कविता नहीं अपने...............

इस कम्प्यूटर की दुनियां में दादी- नानी के किस्से लिखो,
अपनी सभ्यता और संस्कृति को बचाने के लिए कुछ ऐसा लिखो।
आने वाली पीढ़ियों के लिए नई दिशा लिखो,
ऐ कवि कविता नही अपने मन की व्यथा लिखो।

                  रचयिता- मालीग्राम यादव

#साहित्य

128 Love

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"ये दो दिन की जिंदगी भी कितना रंग दिखाती है, कभी हंसाती है तो कभी रुलाती है, कभी ठुकराती है तो कभी अपनाती है। जो कभी अपना था वो पराया हो गया, जो पराया था वो अपना हो गया, इस अपना - पराया के बीच एक फरिश्ता जो जिंदगी संवार गया। ना जाने वो कौन था? क्या था? कहाँ से आया था? जो भी था, जैसा भी था मेरे लिए एक फरिश्ता था। माना कि जिंदगी कभी हंसाती है, तो कभी रुलाती है, पर धूल से ढकी चेहरा को आईना भी वही दिखाती है, ये जिंदगी ही तो है जनाब जो जिंदगी जीना सिखाती है। इस पराई-सी दुनियां में अपनों से मिलाती है, इस मरुस्थल-सी जिंदगी में आशा की बीज बो जाती है, ये जिंदगी ही तो है जो जिंदगी जीना सिखाती है। इस भाग-दौड़ की जिंदगी में भी लोग अपनों को नही भूलाती है, पर वही अपने जिंदगी भर रुलाती है, ये जिंदगी ही तो है जनाब जो जिंदगी जीना सिखाती है । - मालीग्राम यादव"

ये दो दिन की जिंदगी भी कितना रंग दिखाती है,
कभी हंसाती है तो कभी रुलाती है,
कभी ठुकराती है तो कभी अपनाती है।

जो कभी अपना था वो पराया हो गया,
जो पराया था वो अपना हो गया,
इस अपना - पराया के बीच एक फरिश्ता जो जिंदगी संवार गया।

ना जाने वो कौन था? क्या था?
कहाँ से आया था? जो भी था,
जैसा भी था मेरे लिए एक फरिश्ता था।

माना कि जिंदगी कभी हंसाती है, तो कभी रुलाती है, पर धूल से ढकी चेहरा को आईना भी वही दिखाती है,
ये जिंदगी ही तो है जनाब जो जिंदगी जीना सिखाती है।

इस पराई-सी दुनियां में अपनों से मिलाती है,
इस मरुस्थल-सी जिंदगी में आशा की बीज बो जाती है,
ये जिंदगी ही तो है जो जिंदगी जीना सिखाती है।

इस भाग-दौड़ की जिंदगी में भी लोग अपनों को नही भूलाती है,
पर वही अपने जिंदगी भर रुलाती है,
ये जिंदगी ही तो है जनाब जो जिंदगी जीना सिखाती है ।

                            - मालीग्राम यादव

#evening

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