K V Dalwadi

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Nadiad. Dist-Kheda. Gujarat. 7226898222

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"1.सावन क़दम क़दम पर सिसकी और क़दम क़दम पर आहें खिजाँ की बात न पूछो सावन ने भी तड़पाया मुझे 2.बरसात जी करता है तेरे संग भीगू मोहब्बत की बरसात में और रब करे.. उसके बाद तुझे इश्क़ का बुखार हो जाए 3.बादल कुछ हाथों की महँदी छुटी कुछ आँखों के काजल बरसे फ़ूल पात सब जोगी हो गए बिन मौसम जब बादल बरसे 4.मौसम "मोहब्बत"रूह में उतरा हुआ मौसम है जनाब ताल्लुक कम करने से "मोहब्बत" कम नही होती"

1.सावन
क़दम क़दम पर सिसकी और क़दम क़दम पर आहें
खिजाँ की बात न पूछो सावन ने भी तड़पाया मुझे
2.बरसात
जी करता है तेरे संग भीगू मोहब्बत की बरसात में
और रब करे.. उसके बाद तुझे इश्क़ का बुखार हो जाए
   3.बादल
कुछ हाथों की महँदी छुटी कुछ आँखों के काजल बरसे
फ़ूल पात सब जोगी हो गए बिन मौसम जब बादल बरसे
  4.मौसम
"मोहब्बत"रूह में उतरा हुआ मौसम है जनाब
ताल्लुक कम करने से "मोहब्बत" कम नही होती

@मañjü pãwãr @Shalini Bajaj Shalu @Chinmayee Mallik @kashish @Kavita

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"सांवरिया "तुम" मेरे हो ऐसी "हम" "जिद" नही करेंगे मगर हम "तुम्हारे" ही रहेंगे ये तो "हम" "हक" से कहेंगे"

सांवरिया
"तुम" मेरे हो
ऐसी "हम" "जिद" नही करेंगे
मगर हम "तुम्हारे" ही रहेंगे
ये तो "हम" "हक" से कहेंगे

@Sapna singh 🇮🇳 @Meena @Richa....gp🤐 @nidd+ @Pooja Singh

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"जिनकी आंखें आंसू से नम नहीं क्या समझते हो उसे कोई गम नहीं तुम तड़प कर रो दिये तो क्या हुआ गम छुपा के हंसने वाले भी कम नहीं"

जिनकी आंखें आंसू से नम नहीं
क्या समझते हो उसे कोई गम नहीं
तुम तड़प कर रो दिये तो क्या हुआ
गम छुपा के हंसने वाले भी कम नहीं

@reena @P@nchhi @Chaitali Yengade @Anshu writer Kajol Singh

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"भाग्य बारिश का पानी है और परिश्रम कुंए का जल*.... बारिश में नहाना आसान तो है लेकिन रोज नहाने के लिए हम बारिश के सहारे नहीं रह सकते इसी प्रकार भाग्य से कभी-कभी चीजे आसानी से मिल जाती है किन्तु हमेशा भाग्य के भरोसे नहीं जी सकते"

भाग्य  बारिश का पानी है
और
परिश्रम कुंए का जल*....
बारिश में नहाना आसान तो है
लेकिन
रोज नहाने के लिए हम बारिश
के सहारे नहीं रह सकते
इसी प्रकार भाग्य से कभी-कभी
चीजे आसानी से मिल जाती है
किन्तु हमेशा भाग्य के भरोसे नहीं जी सकते

@$@K$hî ©h@ûdh®¥ @chander mukhi ka'jal' agrawal✍ @Roy Megha.....♥♥ @MONIKA SINGH

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"ऐ उड़ते परिंदे कुछ तो दुआ दे खुले आसमान की पिंजरे का दर्द क्या है अब समझ चुका है इंसान भी"

ऐ उड़ते परिंदे
कुछ तो दुआ दे खुले आसमान की

पिंजरे का दर्द क्या है
अब समझ चुका है इंसान भी

#citysunset @$@K$hî ©h@ûdh®¥ @chander mukhi ka'jal' agrawal✍ @Seemran Verma @❣️ℝ𝕠𝕪 𝕄𝕖𝕘𝕙𝕒❣️

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