Sanam shona

Sanam shona Lives in Delhi, Delhi, India

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"ज़िंदगी चंद साँसों की बनी अब मोहताज़ है... तभी तो एहमियत इसकी समझी लोगों ने आज है ©Sanam shona"

ज़िंदगी चंद साँसों की बनी अब मोहताज़ है...
तभी तो एहमियत इसकी समझी लोगों ने आज है

©Sanam shona

#ज़िंदगी

#seashore

36 Love

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"शुक्र है कि..नहीं बिकता ऑक्सीजन किसी मज़हब के नाम पर वरना,बिक जाती कई ज़िंदगियाँ यहाँ सब अलग-अलग दाम पर ©Sanam shona"

शुक्र है कि..नहीं बिकता ऑक्सीजन
 किसी मज़हब के नाम पर
वरना,बिक जाती कई ज़िंदगियाँ यहाँ 
सब अलग-अलग दाम पर

©Sanam shona

#Nodiscrimination

67 Love

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"ये दुनियां बड़ी मतलबी है साहब.... लोग यहाँ हाल भी मतलब से ही पूछते हैं ©Sanam shona"

ये दुनियां बड़ी मतलबी है साहब....
लोग यहाँ हाल भी मतलब से ही पूछते हैं

©Sanam shona

#दुनियां#nojoto🤔

#Hopeless

84 Love

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"ज़रूरी है मास्क लगाना सेनिटाइज करना बस कुछ दिन की ये मजबुरी है। पर इंसानियत हमेशा ज़िंदा रहे ये सबसेे ज्यादा जरूरी है। खुद के बचाव के लिए बनाए रखना दूरी है। पर दूरियों में भी साथ बनाए रखना भी जरूरी है। ज़हर ये हवाओं में फैल चुकी अब पूरी है। फिर भी हमें जीने के लिए साँस लेना भी जरूरी है। -sanam ©Sanam shona"

ज़रूरी है  मास्क लगाना सेनिटाइज करना 
बस कुछ दिन की ये मजबुरी है।
पर इंसानियत हमेशा ज़िंदा रहे
ये सबसेे ज्यादा जरूरी है।

खुद के बचाव के लिए 
बनाए रखना दूरी है।
पर दूरियों में भी साथ 
बनाए रखना भी जरूरी है।

ज़हर ये हवाओं में
फैल चुकी अब पूरी है।
फिर भी हमें जीने के लिए 
साँस लेना भी जरूरी है।
-sanam

©Sanam shona

#PoetInYou

91 Love

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"क्या लिखूँ क्या लिखूँ ..हिन्दू लिखूँ या मुस्लमान लिखूँ या सारा का सारा हिन्दुस्तान लिखूँ क्या लिखूँ..जात -पात की ऊँची दीवार लिखूँ या इंसान के प्रति इंसान का अच्छा व्यवहार लिखूँ क्या लिखूँ..किसी आशिक़ की दर्द भरी प्रेम कहानी लिखूँ या कोरोना बीमारी से जूझ रहे लोगों की परेशानी लिखूँ क्या लिखूँ.. नेताओं की काला बाजारी लिखूँ या भुखमरी गरीबी लाचारी लिखूँ क्या लिखूँ..किसी शायर की शायरी या कोई गज़ल लिखूँ या अपने मुल्क पे गुजरा हिसाब-ए-दर्द एक -एक पल लिखूँ -Sanam ©Sanam shona"

क्या लिखूँ क्या लिखूँ ..हिन्दू लिखूँ या मुस्लमान लिखूँ
या सारा का सारा हिन्दुस्तान लिखूँ
क्या लिखूँ..जात -पात की ऊँची दीवार लिखूँ
या इंसान के प्रति इंसान का अच्छा व्यवहार लिखूँ
क्या लिखूँ..किसी आशिक़ की दर्द भरी प्रेम कहानी लिखूँ
या कोरोना बीमारी से जूझ रहे लोगों की परेशानी लिखूँ
क्या लिखूँ.. नेताओं की काला बाजारी लिखूँ
या भुखमरी गरीबी लाचारी लिखूँ
क्या लिखूँ..किसी शायर की शायरी या कोई गज़ल लिखूँ
या अपने मुल्क पे गुजरा हिसाब-ए-दर्द एक -एक पल लिखूँ
-Sanam

©Sanam shona

#PoetInYou

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