Rahul Bhaskare

Rahul Bhaskare

Write a Heart♥Voice 🌺🌹🌸🌼🍁🍂🍃🌷🌸 मेरी अधुरी दास्ता, जो कभी ना हुई मुकमबल .... **** **** Electrical 💡engineer 🔭🔌🔋📚📙📘📑 I Love india & indian army DReaM - आसमा छुना है......... 😍😍😍😍😍😍 पहचान इतनी है मेरी, की बस मैं एक हिंदुस्तानी हूं........ 😍😍😍😍😍😍😍😍 Facebook 👇 https://m.facebook.com/rahul.bhaskare.3?ref=bookmarks 😌😌😌😌😌😌😌😌 https://www.instagram.com/rahul_bhaskare/

https://www.instagram.com/rahul_bhaskare/

  • Popular
  • Latest
  • Video

""

"गुमशुदा सी ज़िन्दगी,गुमशुदा से हम हैं। माना इसमें खुशियाँ थोड़ी सी कम है। रोज मैं यूँही तसल्ली देता हूँ खुदको, कौनसा हमारी ही ज़िन्दगी में गम हैं। © राहुल भास्करे"

गुमशुदा सी ज़िन्दगी,गुमशुदा से हम हैं।
माना  इसमें  खुशियाँ थोड़ी सी कम है।
रोज मैं  यूँही  तसल्ली  देता  हूँ खुदको,
कौनसा  हमारी  ही  ज़िन्दगी में गम हैं।

© राहुल भास्करे

#गुमशुदा सी #ज़िन्दगी,गुमशुदा से हम हैं।
माना इसमें खुशियाँ थोड़ी सी कम है।
रोज मैं यूँही तसल्ली दे देता हूँ खुदको,
कौनसा एक मेरी ही ज़िन्दगी में #गम हैं।

#Zindagi #zand #rahulbhaskare
#coronavirus #Life #Pain
#Lifezand

37 Love

""

"( तस्वीर/पेंटिंग) कैनवास को, ब्रशो से जोतकर, उस पर प्रेम,वेदना, वात्सल्य,विरह,जैसे, अनगिनत रंगों को बोया जाता है। उसमें “ध्यान” और “संयम” का खाद डाल कर, उसे “धैर्य” से सींचा जाता है। तब जाकर, कल्पनाओं के बीजावरण में, मनोभाव को लिए, कैनवास पर, एक फसल लहराती है। और यह फसल, परिपक्व होने पर कहलाती है, “तस्वीर" © राहुल भास्करे"

( तस्वीर/पेंटिंग)

कैनवास को,
ब्रशो से जोतकर,
उस पर प्रेम,वेदना,
वात्सल्य,विरह,जैसे,
अनगिनत रंगों को बोया जाता है।

उसमें “ध्यान” और “संयम” का
खाद डाल कर,
उसे “धैर्य” से सींचा जाता है।

तब जाकर,
कल्पनाओं के बीजावरण में,
मनोभाव को लिए,
कैनवास पर,
एक फसल लहराती है।

और यह फसल,
परिपक्व होने पर कहलाती है,
“तस्वीर"

© राहुल भास्करे

( तस्वीर/पेंटिंग)

कैनवास को,
ब्रशो से जोतकर,
उस पर प्रेम,वेदना,
वात्सल्य,विरह,जैसे,
अनगिनत रंगों को बोया जाता है।

29 Love
2 Share

""

"कल जब, मेरे पैर उग रहे थे, पूरी तरह उगे भी नहीं थे, फिर भी मैं बिना थके, दूर तक चल लिया करता था। और आज जब, मेरे पैर उग चुके हैं, साथ ही, हाथ से एक, तीसरा पैर भी उग आया है। फिर भी मैं, पास तक नहीं चल पाता, पता है क्यों? क्योंकि...... कल मैं बेटा था, और आज मेरे बेटे हैं। ©राहुल भास्करे"

कल जब,
मेरे पैर उग रहे थे,
पूरी तरह उगे भी नहीं थे,
फिर भी मैं बिना थके,
दूर तक चल लिया करता था।

और आज जब,
मेरे पैर उग चुके हैं,
साथ ही, हाथ से एक,
तीसरा पैर भी उग आया है।

फिर भी मैं,
पास तक नहीं चल पाता,
पता है क्यों?
क्योंकि......

कल मैं बेटा था,
और आज मेरे बेटे हैं।

©राहुल भास्करे

कल जब,
मेरे पैर उग रहे थे,
पूरी तरह उगे भी नहीं थे,
फिर भी मैं बिना थके,
दूर तक चल लिया करता था।

और आज जब,
मेरे पैर उग चुके हैं,

26 Love

""

"ये खुद ही, खुद से ही, कितना दूर है। जरा देखो आदमी कितना मजबूर है। खुद पिंजरा बनाया,खुद ही कैद हुआ, और अब कहता,खुद का ही कसूर है। © राहुल भास्करे"

ये खुद ही, खुद से ही, कितना दूर है।
जरा देखो आदमी कितना मजबूर है।
खुद पिंजरा बनाया,खुद ही कैद हुआ,
और अब कहता,खुद का ही कसूर है।

© राहुल भास्करे

ये खुद ही, खुद से ही, कितना दूर है।
जरा देखो आदमी कितना मजबूर है।
खुद पिंजरा बनाया,खुद ही कैद हुआ,
और अब कहता,खुद का ही कसूर है।

© राहुल भास्करे

#corona #nojoto

23 Love

""

"मैं इन आंखों में आब लिए घूमता हू। दिल में दर्द का सैलाब लिए घूमता हू। होश में रहूं तो कहीं इश्क ना हो जाए, सो अब जेब में शराब लिए घूमता हू। © राहुल भास्करे"

मैं इन आंखों  में आब लिए घूमता हू।
दिल में दर्द का सैलाब लिए घूमता हू।
होश  में रहूं तो कहीं इश्क ना हो जाए,
सो अब जेब में शराब लिए  घूमता हू।

© राहुल भास्करे

मैं इन आंखों में आब लिए घूमता हू।
दिल में दर्द का सैलाब लिए घूमता हू।
होश में रहूं तो कहीं इश्क ना हो जाए,
सो अब जेब में शराब लिए घूमता हू।

© राहुल भास्करे

20 Love