Dharmendra Singh

Dharmendra Singh "Dharma" Lives in New Delhi, Delhi, India

#Writer & Poet...😊 अपनी भावनाओं को शब्दों में पिरो कर कविता या कहानी का रूप देता हूँ।

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"सफ़र सफर लंबा है मेरा, मंज़िल भी दूर है... चलते ही जाना है, दिल कितना मजबूर है। साँसें थम सी गईं हैं, मन परेशान सा है। ये जिन्दगी का सफ़र, बड़ा अनजान सा है।"

सफ़र सफर लंबा है मेरा, 
मंज़िल भी दूर है...
चलते ही जाना है, 
दिल कितना मजबूर है।

साँसें थम सी गईं हैं, 
मन परेशान सा है।
ये जिन्दगी का सफ़र, 
बड़ा अनजान सा है।

#सफ़र

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"इजाज़त है..... तुम्हें मेरे सपनों में आने की, मेरी तन्हा रातों को हसीन बनाने की। मेरी ख़ामोशियों पर ग़ौर ना करना, मुझे आदत है मन ही मन मुस्कुराने की। इजाज़त है..... मेरे दिल में अपना घर बनाने की, मेरी सांसों में समाने की। देदो दस्तक मेरे दिल के दरवाज़े पर, चाहत है तुम्हें अपना बनाने की। ✍️धर्मेन्द्र सिंह (धर्मा)"

इजाज़त है.....
तुम्हें मेरे सपनों में आने की,
मेरी तन्हा रातों को हसीन बनाने की।
मेरी ख़ामोशियों पर ग़ौर ना करना,
मुझे आदत है मन ही मन मुस्कुराने की।

इजाज़त है.....
मेरे दिल में अपना घर बनाने की,
मेरी सांसों में समाने की।
देदो दस्तक मेरे दिल के दरवाज़े पर,
चाहत है तुम्हें अपना बनाने की।

✍️धर्मेन्द्र सिंह (धर्मा)

Rooh_Lost_Soul Rakesh Kumar Ray Anita Pintu Ghosh Mamta Kumari

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"तेरी और मेरी मोहब्बतों के किस्से, कम ना थे, उन गलियों में.... जहाँ मिलते थे चोरी-चोरी। अनकही सी वो बातें, और वो सुनहरा सा ख्वाब, जो अधूरा सा रह गया..... जीने मरने की सारी क़समें, खायीं थी जो दोनों ने। टूट गयीं इस कदर से, जिसका एहसास भी ना था। जाने कितने वादे टूट गये, एक वादा और भी था, जो अधूरा सा रह गया..... मेरी तन्हाई फीकी सी है, तेरी यादों के सामने। दिल मेरा नाजुक सा है, तेरे पत्थर दिल के आगे। अपनी ज़िन्दगी के किस्से क्या कहूँ, तेरी तरह एक किस्सा भी, जो अधूरा सा रह गया....."

तेरी और मेरी मोहब्बतों के किस्से,
कम ना थे, उन गलियों में.... 
जहाँ मिलते थे चोरी-चोरी। 
अनकही सी वो बातें,
और वो सुनहरा सा ख्वाब,
जो अधूरा सा रह गया.....

जीने मरने की सारी क़समें,
खायीं थी जो दोनों ने। 
टूट गयीं इस कदर से,
जिसका एहसास भी ना था।
जाने कितने वादे टूट गये,
एक वादा और भी था, 
जो अधूरा सा रह गया.....

मेरी तन्हाई फीकी सी है,
तेरी यादों के सामने।
दिल मेरा नाजुक सा है,
तेरे पत्थर दिल के आगे। 
अपनी ज़िन्दगी के किस्से क्या कहूँ,
तेरी तरह एक किस्सा भी,
जो अधूरा सा रह गया.....

@Rooh_Lost_Soul @Sayaro Bano @Payal Singh @rifa patodi @neetu शharmA_POet✒

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"अपनों से वफ़ा की उम्मीद कर बैठा ! मेरी मासूमियत का, सब ने लुत्फ़ उठाया, लेकिन मेरी शराफत, किसी को नज़र नहीं आती... नज़रंदाज कर देता हूँ सभी को, शायद ये ग़लती थी मेरी, मैं जो... अपनों से वफ़ा की उम्मीद कर बैठा...... जब भी आईने में देखता हूँ खुद को, नफ़रत सी होती है ख़ुद से मुझे। भूल कर भी भूल कर देता हूँ, पारखी नज़र जो ना थी मेरी... पामाल भी हुआ उन्हीं की ख़ातिर, क्यों मैं.... अपनों से वफ़ा की उम्मीद कर बैठा..... ✍️धर्मेन्द्र सिंह (धर्मा) पामाल=नष्ट हुआ"

अपनों से वफ़ा की उम्मीद कर बैठा ! मेरी मासूमियत का, सब ने लुत्फ़ उठाया,
लेकिन मेरी शराफत,
किसी को नज़र नहीं आती...
नज़रंदाज कर देता हूँ सभी को,
शायद ये ग़लती थी मेरी, मैं जो...
अपनों से वफ़ा की उम्मीद कर बैठा......

जब भी आईने में देखता हूँ खुद को,
नफ़रत सी होती है ख़ुद से मुझे।
भूल कर भी भूल कर देता हूँ,
पारखी नज़र जो ना थी मेरी...
पामाल भी हुआ उन्हीं की ख़ातिर, क्यों मैं....
अपनों से वफ़ा की उम्मीद कर बैठा.....
✍️धर्मेन्द्र सिंह (धर्मा)

पामाल=नष्ट हुआ

Rooh_Lost_Soul

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"ऐसे तेरा रूठ जाना, बिन कुछ कहे तेरा दूर हो जाना। मैं बेख़बर तो नहीं रहता तेरी बातों से, फिर तू क्यों बात नहीं करती? कोई वज़ह तो होगी..... मैं इतना भी कच्चा नहीं हूँ मोहब्बत का, प्यार के गीत मैं भी गुनगुनाता हूँ। नजदीकियां भी बढ़ गयी हैं, हम दोनों की... फिर भी खामोश क्यों है तू? कोई वज़ह तो होगी..... ज़िल्लत भरी जिन्दगी थी मेरी, इन्साफ की आश किससे रखता? तेरी मोहब्बत में सब कुछ भुला दिया, दिल के हरेक ज़र्रे में तेरी ही तस्वीर है, जाने क्यों? कोई वज़ह तो होगी..... तेरे ना होने से धड़कनें बढ़ने लगती हैं मेरी, तेरे क़रीब होने से खुद को मुकम्मल महसूस करता हूँ.... अब आ गयी हो दूर ना जाना मुझसे, ऐसे फिर से तेरा लौट आना, आखिर कोई वजह तो होगी..... अब लेकिन चाहे कुछ भी हो, मुक़ाबला करूँगा सबसे.... अपने आप से, और उन सभी से, सबका मेरे लिए इस तरह ज़हर बरसाना, आखिर, कोई वज़ह तो होगी......."

ऐसे तेरा रूठ जाना,
बिन कुछ कहे तेरा दूर हो जाना।
मैं बेख़बर तो नहीं रहता तेरी बातों से,
फिर तू क्यों बात नहीं करती?
कोई वज़ह तो होगी.....

मैं इतना भी कच्चा नहीं हूँ मोहब्बत का,
प्यार के गीत मैं भी गुनगुनाता हूँ।
नजदीकियां भी बढ़ गयी हैं, हम दोनों की...
फिर भी खामोश क्यों है तू? 
कोई वज़ह तो होगी.....

ज़िल्लत भरी जिन्दगी थी मेरी,
इन्साफ की आश किससे रखता?
तेरी मोहब्बत में सब कुछ भुला दिया, 
दिल के हरेक ज़र्रे में तेरी ही तस्वीर है, जाने क्यों?
कोई वज़ह तो होगी.....

तेरे ना होने से धड़कनें बढ़ने लगती हैं मेरी,
तेरे क़रीब होने से खुद को मुकम्मल महसूस करता हूँ....
अब आ गयी हो दूर ना जाना मुझसे,
ऐसे फिर से तेरा लौट आना, आखिर
कोई वजह तो होगी.....

अब लेकिन चाहे कुछ भी हो, 
मुक़ाबला करूँगा सबसे.... 
अपने आप से, और उन सभी से, 
सबका मेरे लिए इस तरह ज़हर बरसाना, आखिर, 
कोई वज़ह तो होगी.......

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