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बुशरा तबस्सुम

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बुशरा तबस्सुम

वास्तविकता की ठसक से
टूटती तंद्राएं 
निरंतर
घातक होती जाती नींदों के लिए
बदलता जा रहा नींदों का स्वभाव
नेत्रों के मान-मनौव्वल
नकार रही नींदें 
रातों की गहनता से
नितांत अकेले जूझते
सोच रही हूं
कि बस अब 
वास्तविकताओं से निभाऊंगी
अन्यथा
और कहां जाऊंगी

🌿 बुशरा

©बुशरा तबस्सुम
  #समझौता
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बुशरा तबस्सुम

मन के वातावरण में ...
घुल रही हैं....
.. शीतल उदासियाँ ,
जानते हो ना 
तुम्हे धूप बनना है अब

©बुशरा तबस्सुम
  #धूप
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बुशरा तबस्सुम

बाहर ही नहीं
भीतर भी है 
अन्यमनस्कता की शुष्क शीत , 
उधर मौन लपेटा है फिलहाल 
कभी किसी रोज़
कुनकुनी धूप बन चमका कोई विचार
तो उतार दूँगी मौन के लबादे, 
शब्द पहनकर निखरूंगी
विचारों की धूप में 
पूर्णतया बिखरूंगी

©बुशरा तबस्सुम
  #शीत
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बुशरा तबस्सुम

प्रीत प्रज्ज्वलित रही
शीर्ष पर,
शेष सब पिघलता रहा
उम्र भर।

©बुशरा तबस्सुम
  #प्रज्जवलन
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बुशरा तबस्सुम

किसी गुनगुने एहसास की छुअन से 
न जाने क्या पिघलता है 
भीतर ,
देखो अधरों के पर्वतों से .....
बह रहे हैं कितने 
मुसकानों के 
निर्झर 

🌿 बुशरा

©बुशरा तबस्सुम
  #touch
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बुशरा तबस्सुम

धन का उपयोग हम हर जगह
नहीं कर सकते,न ही उससे सब कुछ खरीद सकते हैं।
लेकिन हमारा असली धन है,चित की समृद्धि,आत्मीयता
अपनों से सत्संग,
जिसे हम कहीं भी दिव्यता पूर्ण उपयोग कर सकते हैं !!

🌹धनतेरस के सुअवसर पर हम सब मन, वचन,कर्म और अपनत्व से धनवान हों , ऐसी मेरी शुभेच्छा है🌹

©बुशरा तबस्सुम
  #HappyDhanteras2023
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बुशरा तबस्सुम

क्यूँ कहूँ अधूरा है तुम्हारा समर्पण ,
सोचना यह है .....
मैं कितना कर पाई अर्पण !

🌿 बुशरा

©बुशरा तबस्सुम
  #समर्पण
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बुशरा तबस्सुम

बस इसलिए 
कि सहूलियत रहे मुझे ,
बहुत खुश रहना तुम ;
...
दुख की कोई नदी पार करोगे 
तो 
भीग मैं भी जाऊँगी ।

...........
बुशरा तबस्सुम

©बुशरा तबस्सुम
  #फिक्र
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बुशरा तबस्सुम

कोई बड़ी बात नही होती 
प्रस्तिथियों की प्रतिकूलता ,
बहलावे को हैं कई कई साधन ,
 मैं ,मुसकान की हथेली पर रख कर सब्र 
बहुत देर तक बना सकती हूँ 
संतुलन।।

©बुशरा तबस्सुम
  #Hriday


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