Shahab

Shahab Lives in Dhanbad, Jharkhand, India

𝙈𝙐𝙎𝙄𝘾 𝘼𝘿𝘿𝙄𝘾𝙏𝙀𝘿🎶 𝙏𝙍𝙐𝙎𝙏❌ 𝙈𝙔 𝘿𝘼𝙔- ❶❻ 𝘿𝙀𝘾 🎂

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मैंने सोचा था एक किताब लिखूंगा जिसमें दर्द बेहिसाब लिखूंगा खुशियां मिल जाए थोड़ी बहुत ऐसा एक ख़्वाब लिखूंगा कलम पकड़ कर हाथों में मन चाही हर बात लिखूंगा मैं अकेला होकर भी बस किसी का साथ लिखूंगा सुन कर वो बस आ जाए ऐसे अल्फाज़ लिखूंगा मेरे दर्द का एहसास उसे हो जाए अश्कों से जज़्बात लिखूंगा मैंने सोंचा था एक किताब लिखूंगा.... ©Shahab

#शायरी #किताब  मैंने सोचा था एक किताब लिखूंगा 
जिसमें दर्द बेहिसाब लिखूंगा

 खुशियां मिल जाए थोड़ी बहुत 
ऐसा एक ख़्वाब लिखूंगा 

 कलम पकड़ कर हाथों में
 मन चाही हर बात लिखूंगा

 मैं अकेला होकर भी 
बस किसी का साथ लिखूंगा

 सुन कर वो बस आ जाए
ऐसे अल्फाज़ लिखूंगा

 मेरे दर्द का एहसास उसे हो जाए
 अश्कों से जज़्बात लिखूंगा 

मैंने सोंचा था एक किताब लिखूंगा....

©Shahab

मैं दोष देता रहा कंपनी वालों को बैटरी कितनी चलती है ब्रेकअप के बाद पता चला... ©Shahab

#ब्रेकअप #शायरी  मैं दोष देता रहा कंपनी वालों को 

बैटरी कितनी चलती है ब्रेकअप के बाद पता चला...

©Shahab
#ज़िन्दगी #मायूसी  हम देखते तो हैं उन्हें , पर अब वो बात नहीं रहा

एक दरमियां होता बीच में , जैसे साथ नहीं रहा

उनकी आंखें अब हमें , ढूंढती ही नहीं कभी

हम दोनों एक थे शायद अब उन्हें याद नहीं रहा

अब मुस्कुराहट कोसों दूर , पास मायूसी के मेले से हो गए

वो आस-पास तो है , पर अब हम थोड़े अकेले से हो गए

©Shahab

नाराज़गी तुझ से नहीं , बस नज़रों में एक पहरा सा है तू कह रही भूल जाऊं सब , ये ज़ख्म थोड़ा गहरा सा है अब कोशिशें है की यादों में तुझे ना लाऊं मैं पर जिस किसी को देखूं मैं , लगता तेरा चेहरा सा है हो गई मुद्दत तुझे यूं छोड़कर जाए हुए है बदनसीबी ही सही जो वक्त ये ठहरा सा है चलो करते हैं एक सौदा यहां तू भूल मुझे मेरा मन भी तुझे भुला देगा अब छोड़ कर देख मुझे , मेरा वादा है मेरी बेरुखी तुझे रूला देगी बहुत हंसी थी उस रात तेरे होठों पर जबकि मेरी आंखों में अश्कों का बौछार था कोई था नहीं गम बांटने को मेरे , बस रूमाल दो चार था ... ©Shahab

#ग़म #लव  नाराज़गी तुझ से नहीं , बस नज़रों में एक पहरा सा है

तू कह रही भूल जाऊं सब , ये ज़ख्म थोड़ा गहरा सा है

अब कोशिशें है की यादों में तुझे ना लाऊं मैं

पर जिस किसी को देखूं मैं , लगता तेरा चेहरा सा है

हो गई मुद्दत तुझे यूं छोड़कर जाए हुए

है बदनसीबी ही सही जो वक्त ये ठहरा सा है

चलो करते हैं एक सौदा यहां 

तू भूल मुझे मेरा मन भी तुझे भुला देगा

अब छोड़ कर देख मुझे , मेरा वादा है मेरी बेरुखी तुझे रूला देगी

बहुत हंसी थी उस रात तेरे होठों पर जबकि मेरी आंखों में अश्कों का बौछार था

कोई था नहीं गम बांटने को मेरे , बस रूमाल दो चार था ...

©Shahab

#ग़म

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ख्यालों में बस ख्याल थे उसके चेहरे पर उलझे बाल , बेमिसाल थे उसके कितने सुलझे सवाल करता मैं उससे हर सवाल के उलझे , जवाब थे उसके कितना हसीन नज़ारा था उस दिन का जब मेरे हाथों में , हाथ थे उसके जब मैं नहीं होता आस-पास कहीं भी दीदार को मेरे , आंखें बेहाल थे उसके शायद इन लम्हों को रुक जाना ही बेहतर था मेरे लिए फैमिली , खिलाफ थे उसके... ©Shahab

#ज़िन्दगी #खिलाफ  ख्यालों में बस ख्याल थे उसके
चेहरे पर उलझे बाल , बेमिसाल थे उसके

कितने सुलझे सवाल करता मैं उससे
हर सवाल के उलझे , जवाब थे उसके

कितना हसीन नज़ारा था उस दिन का
जब मेरे हाथों में , हाथ थे उसके

जब मैं नहीं होता आस-पास कहीं भी
दीदार को मेरे , आंखें बेहाल थे उसके

शायद इन लम्हों को रुक जाना ही बेहतर था
मेरे लिए फैमिली , खिलाफ थे उसके...

©Shahab

सड़कों पर दिन में भीड़ रात में कर्फ़्यू कोरोना की तीसरी लहर का डर है सिस्टम पर छाई बदहवासी नया साल गर आ भी गया तो क्या हुआ माहौल का देश पे ये असर है लगता अपनों अपनों से अब मुझे डर है हिंदू मुस्लिम का गंदा माहौल बनाया गया नया साल गर आ भी गया तो क्या हुआ गरीबों की स्थिति बद से बदतर है नौजवानों को अलग सा डर है बेरोज़गारी अपने चरम पर है नया साल गर आ भी गया तो क्या हुआ ©Shahab

#नया_साल #विचार  सड़कों पर दिन में भीड़ रात में कर्फ़्यू
कोरोना की तीसरी लहर का डर है
सिस्टम पर छाई बदहवासी 
नया साल गर आ भी गया तो क्या हुआ

माहौल का देश पे ये असर है 
लगता अपनों अपनों से अब मुझे डर है 
हिंदू मुस्लिम का गंदा माहौल बनाया गया
 नया साल गर आ भी गया तो क्या हुआ

गरीबों की स्थिति बद से बदतर है
नौजवानों को अलग सा डर है 
बेरोज़गारी अपने चरम पर है 
नया साल गर आ भी गया तो क्या हुआ

©Shahab
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